
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। आज मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में बिहार पूरे देश में नंबर वन बन चुका है। बिहार को मिली इस उपलब्धि में डाॅ दयाराम के सूक्ष्म सूझ, समर्पण, प्रतिबद्धता एवं त्याग तथा इस विश्वविद्यालय बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। कभी सिर्फ ठंडे प्रदेशों में उगया जाने वाला और बडे बडे होटलों और अमीरों के थाली की रौनक मशरूम आज बारहो महीने जाता है और गरीबों की थाली का स्वाद बढा रहा है यह डाॅ दयाराम के त्याग और प्रतिबद्धतापूर्ण समर्पण का ही परिणाम है। इसीलिए डाॅ दयाराम को मशरूम का गांधी और मशरूम मैन भी कहा जाता है।
निदेशक प्रसार शिक्षा डाॅ रत्नेश कुमार झा ने मंगलवार को अखिल भारतीय समन्वित मशरूम अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च द्वारा आयोजित मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक विषयक 7 दिवसीय प्रशिक्षण के उद्घाटन समारोह के दौरान उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में मशरूम रिसर्च सेंटर बनाने से लेकर बिहार में मशरूम क्रान्ति लाने और बिहार को नंबर वन बनाने तक सफर में डाॅ दयाराम का त्याग सदियों तक याद रखा जायेगा।
बताते चलें कि पुस्तकालय अध्यक्ष डाॅ राजेश मणि शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित आगामी 17 नवम्बर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन प्रभारी पदाधिकारी डॉ राम प्रवेश प्रसाद ने की। मुख्यअतिथि सह अध्यक्ष डॉ राजेश मणि शर्मा के साथ प्राध्यापक अनुसंधान निदेशालय डॉ मुकेश कुमार सिंह, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ रत्नेश कुमार झा, एवं सलाहकार मशरूम डॉ दयाराम द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर प्रशिक्षण के उद्घाटन के बाद तमाम अतिथियों का शॉल एवं पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया और, कुलगीत प्रसारण के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ।
स्वागत संबोधन प्राध्यापक अनुसंधान निदेशालय डॉ मुकेश कुमार सिंह ने किया। इस प्रशिक्षण शिविर में समस्तीपुर सहित विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के दो दर्जन से अधिक युवा एवं तकनीकी विशेषज्ञ प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डाॅ शर्मा ने कहा कि बिहार मशरूम उत्पादन में नंबर वन बन गया, इसमें संदेह नहीं किन्तु मशरूम के क्षेत्र में हमारे अनुसंधान, प्रयास, एवं उपलब्धियों, को राष्ट्रीय स्तर पहुंचाने की जरूरत है। मशरूम एवं इसके उत्पादों के वेल्यू एडिशन पर जोर देते हुए उन्हेांने कहा कि आज मशरूम अपने प्रभेदों और उत्पादों के विविधता के एक पूर्ण व्यवसायिक क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुका है।
आवश्यकता है अब इसके योजनाबद्ध व्यवसायिकरण की और मशरूम किसानों व उत्पादाके को उचित बाजार उपलब्ध कराने की। वहीं वक्ताओं ने कहा कि हालिया दिनों में मशरूम ही नहीं मशरूम से बने उत्पादों की भी वैश्विक स्तर पर मांग में बेतहाशा वृद्धि हुई है। जिससे एक विकसित व्यवसायीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ और इस क्षेत्र में व्यवसाय एवं रोजगार की संभावनाओं में आशातीत उछाल आया है।
डॉ आरपीके रॉय बेसिक साइंस ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधक अमित गुजन के अलावा सुभाष कुमार सहित मशरूम कर्मी एवं प्रशिक्षु मौजूद थे।