
ओइनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क समस्तीपुर । स्वास्थ्य ही सबसे बडा धन है, बिना अच्छे स्वास्थ्य के पैसे का कोई महत्व नहीं है। पौष्टिक आहार एवं सुपाच्य भोजन शरीर में बिमारियों से लड़ने की क्षमता बढाते है और मोटे अनाज इस केलिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। प्राचीन काल में इन्हीं मोटे अनाज के दम पर लोग स्वस्थ रहते थे। उक्त बातें वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ रविन्द्र कुमार तिवारी ने एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही।
बताते चलें कि मंगलवार को राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के बिरौली स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में एक दिवसीय प्रशिक्षण का अयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में मोहनपुर प्रखंड की 50 आँगनवाड़ी की सेविकाएँ उपस्थित हुई।
प्रशिक्षण का शुभारंभ एवं प्रतिभागियो का स्वागत करते हुए केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ रविन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि पोषण माह का लक्ष्य मुख्य रूप से वे कुपोषित महिलायें एवं बच्चे हैं जिनकी स्थिति दयनीय होती है। इस दौरान उन्होंने पोषण की महत्ता के बारे में बताते हुए मोटे अनाज के लिए चल रहे परियोजना के बारे में जानकारी साझा की।
मोटे अनाज के पौष्टिक गुणों के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया कि इसकी उपज बढाने के लिए केन्द्र द्वारा विभिन्न परियोजनाएँ चलाई जा रही है तथा विश्वविद्यालय द्वारा इनकी बीज भी उपलब्ध कराई जा रही है।
केन्द्र की गृह वैज्ञानिक श्रीमति वर्षा कुमारी ने खाद्य एवं पोषण की जानकारी दी उन्होंने बताया की गेहूँ, मक्का, मूंग, मडुआ एवं अन्य मोटे अनाजों से किस प्रकार हम छोटे बच्चों के लिए विभिन्न उपरी आहार बना सकते हैं। जो बाजार में उपलब्ध उपरी आहार की तुलना में कम खर्च में अधिक पौष्टिक होता है।
इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे किशोर अवस्था से महिलाओं में धातृ अवस्था तक अनिमिया साथ ही कुपोषण का कुचक्र चालू होता है। वहीं उद्यान वैज्ञानिक डॉ. धीरू कुमार तिवारी ने पोषण वाटिका में लगाये जाने वाले सब्जियों तथा सभी सब्जियों के पौष्टिक गुण के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षणार्थी को केन्द्र के विभिन्न इकाई का भ्रमण कराया गया एवं चर्मीकम्पोस्ट उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन, पोषण वाटिका, कृषि अभियंत्रण एवं अन्य की जानकारी दी तथा एक आम का पौधा आँगनवाडी केन्द्र पर लगाने हेतु प्रदान किया गया।