
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर । विगत पूर्वानुमान की अवधि में उत्तर बिहार में अनेक स्थानों पर मध्यम वर्षा हुई है, अतः किसान भाई धान की रोपाई प्राथमिकता के आधार पर करें। मौसम के प्रतिकूल होते देख किसान भाईयों केलिए समसामयिक सुझाव जारी करते हुए जलवायू परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केन्द्र के नोडल आफिसर डाॅ अब्दुल सत्तार ने उक्त सुझाव दिए।
उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि की किस्मों के लिए 30 किलोग्राम नेत्रजन, 60 किलोग्राम स्फुर एवं 30 किलोचाम पोटाश के साथ 25 किलोगाम जिंक सल्फेट वा 15 किलोगाम प्रति हेक्टर विलेटेड जिंक का व्यवहार करें। धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 2-3 दिन बाद तथा एक सप्ताह के अन्दर ब्यूटाक्लोर (3 लीटर दवा प्रति हेक्टेयर) या प्रीटलाक्लोर (1.5 लीटर दवा प्रति हेक्टर) या पेन्डीमिथेलीन (3 लीटर दवा प्रति हेक्टर) का 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर एक हेक्टर क्षेत्र में छिड़काव करें।
सब्जियों में आवष्यकतानुसार निकाई मुढाई करें तथा लाही, सफेद मक्खी मक्खी व व चूसक चूसक कीड़ों की निगरानी करें। इन कीट का प्रकोष दिखाई खाई देने पर बनाब के लिए इमिडाक्लोरोप्रिड दवा का 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल कर फसल में छिड़काव करें।
प्याज की बीजस्थली में जहाँ बिचढ़े 15 से 20 दिनों के हो गये हों, में खर-पतवार निकालें। पौधशाला को सूप अधवा वर्षा से बचाने के लिए 40 छायादार नेट से 6-7 फीट की ऊचाई पर ढकने का कार्य करें। आर्दगलन (टेन्थिम ऑफ) रोग की नियमित रूप से निगरानी करते रहें।
उचॉस जमीन में अरहर की बुआई करें। उपरी जमीन में बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किलो नेत्रजन, 45 किलो स्फुर, 20 किलो पोटाश तथा 20 किलो सल्फर का व्यवहार करें। बहार, पूसा 5. नरेड अरहर 1. मालवीय -13, राजेन्द्र अरहर 1 आदि किस्में बुआई के लिए अनुशसित है। बीज दर 18 20 किलो प्रति हेक्टेयर रखें। बुआई के 24 घंटे पूर्व 25 ग्राम श्रीरम दवा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करे। बुआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए।
डाॅ सत्तार ने कहा कि आम के पौधों की उम (10 वर्ष से अधिक) के अनुसार फलन समाप्त होने के बाद अनुशंसित उर्वरको जैसे 15-20 किलोग्राम सही गोबर की खाद, 125 किलोग्राम नेत्रजन, 300-400 ग्राम फॉसफोरस, 10 किलोग्राम पोटाष, 50 ग्राम बोरेक्स तथा 15-20 ग्राम बाइमेट प्रति पौधा प्रति वर्ष के अनुसार उपयोग करें। जिससे अगले वर्ष पौधे फलन में आ सके तथा उनका स्वास्थ अच्छा बना रहे।
डाॅ अब्दुल सत्तार ने कहा कि केला की रोपाई करें उत्तर बिहार में लम्बी किस्मों के लिए अलपान, चम्पा, कंथाली, मालभोग, चिनियाँ, शक्कर चिनियाँ, फिआ-23 तथा बौनी एवं खाने वाली किस्मों के लिए पैडनेन, रोबस्टा, बसराई, फिया अनुषंसित है। सब्जी वाली किस्में बत्तीसा, सावा, बनकेल, कचकेल, तथा सब्जी एवं फल दोनों में उपयोग आने वाली किस्में कोठियाँ, मूतियाँ, दुधसागर एवं चकिया अनुशंसित है। लम्बी जातियों में पौधा से पौधा की दूरी 20 मीटर है एवं बौनी जातियों में 1.5 मीटर रखें।