
Oini 24 पूसा। “सौंदर्य बोध, कोमलता आदि का प्रतीक ‘फूल’ भारतीय संस्कृति की विरासत और पहचान है। आदि काल से विभिन्न त्योहारों व विभिन्न अवसरों पर द्वार से शय्या तक साज–सज्जा सहित फूलों के अलग अलग प्रयोग होते हैं तो दूसरी तरफ भगवान के श्रृंगार के अलावा उनको फूल अर्पित भी किये जाते हैं।
सौंदर्य प्रसाधन, रंग आदि निर्माण के साथ–साथ श्रृंगार का अभिन्न अंग भी हैं ये फूल। इनको देखने से ही मन पवित्र हो जाता है।”
डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में आयोजित ‘गुलदाउदी फूलोत्सव फील्ड डे’ के अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने उक्त बातें कही।
फूलों की खेती में व्यापक संभावना :
उन्होंने कहा कि, “वर्तमान में राज्य में अधिकांश फूल पश्चिम बंगाल के कोलकाता सहित अन्य राज्यों से आते हैं। जबकि पर्यावरण और मिट्टी के लिहाज से बिहार में फूलों की खेती के अनुकूल परिस्थिति उपलब्ध है। यहां फूलों के खेती और इस क्षेत्र में स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।” इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि, “वे फूलों की खेती की ओर किसानों को जागरूक करें।”
गुलदाउदी की नई प्रजाति कर रहे विकसित :
डॉ पाण्डेय ने बताया कि, “विश्वविद्यालय गुलदाउदी के नये प्रजातियों को विकसित कर रहा है जो परीक्षण के अंतिम चरण में है। जिसे आने वाले समय में अनुसंधान परिषद की बैठक में रिलीज करने के लिए प्रस्तुत किया जायेगा।”
फील्ड डे पर सजी गुलदाउदी की प्रदर्शनी :
बताते चलें कि, डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में ‘गुलदाउदी फूलोत्सव फील्ड डे’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुलपति डॉ पाण्डेय ने, फील्ड डे पर प्रदर्शित गुलदाउदी के विभिन्न रंगों के सौ से अधिक प्रजातियों के फूल, फूलों से बने विभिन्न प्रकार के आभूषण, और पुष्प गुच्छ आदि का निरीक्षण किया।
प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को किया जा रहा जागरूक :
इस दौरान स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ मयंक राय ने कहा कि, “कुलपति डॉ पांडेय बिहार राज्य को फूल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। इसी क्रम में किसानों को और फूल प्रेमियों को जागरूक करने के लिए इस फूलोत्सव फील्ड डे का आयोजन किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि, “विश्वविद्यालय अगली बार से इसे वृहत समारोह के रूप में आयोजित करेगा। साथ ही फूलों की खेती व प्रसंस्करण को लेकर किसानों को प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करेगा।”
अनुकूल पारिस्थितिकी और अच्छा बाजार उपलब्ध :
इसी क्रम में कुलसचिव डॉ पीके प्रणव ने कहा कि, “बिहार में फूलों का अच्छा बाजार और अनुकूल पारिस्थितिकी उपलब्ध है। ऐसे में फूलों की खेती से किसानों को अच्छी आमदनी हो सकती है। किसानों को इस दिशा में आकर्षित करने में इस तरह के आयोजन कारगर सिद्ध होंगे”।
कई पदाधिकारी थे मौजूद :
फूलोत्सव फील्ड डे का आयोजन डॉ रौशनी अग्निहोत्री एवं डॉ पार्वती देवरम्मा के द्वारा किया गया था। इस दौरान गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ देवेन्द्र सिंह, स्कूल आफ़ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ रामदत्त, सह निदेशक अनुसंधान डॉ एस.के. ठाकुर, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ महेश कुमार, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।