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ओईनी 24 डेस्क मोरवा । श्रावण मास की पहली सोमवारी को आशानुरूप जिले के मोरवा स्थित खुदनेश्वर स्थान मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं व कांवरियों ने जलाभिषेक किया। सोमवार अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं को तांता लगा रहा। भीड पर नियंत्रण केलिए मंदिर कमिटी के साथ स्थानीय पुलिस भी तैनात रही।
श्रद्धालुओं व कांवरियों की सुविधा और सुरक्षा केलिए जगह-जगह बैरिकेटिंग और सीसी कैमरे के साथ बडी संख्या में पुलिस बल तैनान किए गये थे।
खुदनेश्वर स्थान! जो केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सांप्रदायिक सौहार्द की अप्रतिम मिसाल है। जी हां, गंगा जमुनी तहजीब का संदेश देता यह स्थान है समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित मोरवा का खुदनेश्वर धाम। जहां एक ही छत के नीचे मुस्लिम महिला खुदनी बीबी का मजार और शिवलिंग दोनों स्थापित है।
यहां आने वाले भक्तों की श्रद्धा न सिर्फ दर्शनीय है अपितु अद्भुत अहसास कराती है जब श्रद्धालु महादेव का जलाभिषेक करते के साथ ही खुदनी बीबी के मजार पर फूल बेलपत्र चढाना और अगरबत्ती जलाना नहीं भूलते। बताते चलें कि हिन्दू-मुस्लिम एकता का बेमिसाल उदाहरण खुदनेश्वर धाम की स्थापना 13वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है।
कभी यहां निर्जन वन था। इस जगह अन्य लोगों के साथ खुदनी बीबी नाम की एक मुस्लिम महिला गाय चराने के लिए आया करती थी। वन में स्थित एक खास जगह पर उसकी गाय अपने आप दूध देने लगती थी। यह खुदनी ने देख लिया तो देवाधिदेव महादेव प्रकट होकर उसे इस रहस्य को नहीं बताने के लिए कहा। साथ ही कहा कि जिस दिन यह बात वह किसी को कह देगी उसी दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी।
शाम को जब वह गाय लेकर घर जाती तो उसे घरवालों की डांट सुननी पड़ती। खुदनी बीबी पर आरोप लगता था कि इसी ने दूध निकाल कर किसी को दे दिया होगा। बार-बार अपने ऊपर आरोप लगते देख एक दिन खुदनी ने यह रहस्यघर के लोगों को बता दिया। जिसके बाद शिव आज्ञा के मुताबिक उसकी मृत्यु हो गई।
खुदनी बीबी की मौत के बाद घर के लोगों ने उसी जगह पर खुदनी को दफना दिया और मजार बना दिया। कुछ दिनों बाद मजार के ठीक बगल में शिवलिंग प्रकट हुआ तो दोनों संप्रदाय के लोगों ने साथ मिलकर यहां पर मंदिर बनवा दिया तथा इस मंदिर का नाम खुद्नेश्वर स्थान मंदिर पड़ गया। तब से यहां पूजा-अर्चना चलती आ रही है।
कहा जाता है कि यहां जो भी कोई अपनी मनोकामना लेकर यहां जलाभिषेक करते हैं, उनकी कामना बाबा भोले अवश्य पूरा करते हैं।