
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा । छात्रों को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा। साथ ही विश्वविद्यालय शिक्षकों, वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण भी जल्दी ही आयोजित करवायेगा ताकि विश्वविद्यालय में लोग स्मार्ट और सटीकता के साथ बेहतर तरीके से कार्य कर सकें।
डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में साफ्ट स्किल और इंटरव्यू स्किल के माध्यम से करियर के विकास विषय पर आधारित तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही।
विश्वविद्यालय सेमेस्टर ब्रेक के दौरान देगा ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण :
उन्होंने कहा कि, “विश्वविद्यालय अपने छात्रों को सेमेस्टर ब्रेक के दौरान ड्रोन पायलट का भी प्रशिक्षण देगा। जिसको लेकर एक अनूठा माॅडल बनाया जा रहा है, जिसमें छात्रों से पायलट ट्रेनिंग के लिए कुल 45000 रूपए फीस के बदले कुछ हजार का न्यूनतम फीस लिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अगले सेमेस्टर में सभी प्रशिक्षित छात्रों को ड्रोन स्प्रेइंग, लैंड सर्वे आदि का ड्रोन से होने वाले कार्य विश्वविद्यालय में ही उपलब्ध करवायेगी और उसके मेहनताना के रूप में न्यूनतम शुल्क भी उन्हें डिग्री मिलने से पहले वापस कर दी जाएगी।”
विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हों पूरी दुनिया में सबसे बेहतर :
‘बताते चलें कि सोमवार को आरंभ इस कार्यशाला के दौरान, अतिथियों के स्वागत सम्मान, वीसी सहित अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन व कुलगीत प्रसारण के उपरांत कार्यशाला के उद्घाटन् सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने कहा कि, “विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को समझना चाहिए कि वे दूसरों से अलग और विशिष्ट हैं और विश्वविद्यालय उन्हें अतिविशिष्ट बनाने के लिए लगातार प्रयत्न कर रहा है। वे चाहते है कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी पूरी दुनिया में सबसे बेहतर हों।”
‘साफ्ट स्किल और इंटरव्यू स्किल संचार कौशल के दो अंग :
उन्होंने कहा कि, “साफ्ट स्किल और इंटरव्यू स्किल संचार कौशल के दो अंग हैं, इनका जीवन में काफी महत्व है। अपने विषय के साथ-साथ इसमें भी कौशल हासिल करना चाहिए।”
“अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में प्लेसमेंट और विदेश में काम करने के दौरान छात्रों को साफ्ट स्किल और इंटरव्यू स्किल की बहुत आवश्यकता होती है। इसको लेकर छात्र दिल्ली के निजी संस्थानों में लाखों रुपए देकर प्रशिक्षण लेते हैं। इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि सेमेस्टर ब्रेक के दौरान छात्रों केलिए इस तरह का प्रशिक्षण आयोजित किया जाए।”
विश्वविद्यालय में विकसित हुई एक नई कार्य संस्कृति :
उपस्थित स्कूल आफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ रामदत्त ने कहा कि, “विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों में तेजी से प्रगति हुई है और एक नई कार्य संस्कृति विकसित हुई है। फलतः विश्वविद्यालय के छात्र देश विदेश में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। आने वाले समय में भारत के छात्र पूरी दुनिया को नई राह दिखायेंगे।”
वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी थे उपस्थित :
धन्यवाद ज्ञापन डॉ आर किरण ने किया जबकि संचालन डॉ कविताम्बिका ने किया। मौके पर सह प्राध्यापक, डॉ संजीत कुमार समीर, डॉ रितंभरा सिंह, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ कुमार राज्यवर्धन, डॉ रमनदीप सिंह, डॉ एम संतोष, डॉ श्रावंती, रश्मि सिन्हा सहित विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।