

ओईनी न्यूज नेटवर्क।
पूसा। उद्यमिता के लिए उद्देश्य केंद्रित होना जरूरी है। तभी अहम मुकाम को हासिल किया जा सकता है। डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च द्वारा आयोजित दूधिया, व पुवाल मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक विषयक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि निदेशक अनुसंधान डाॅ एके सिंह ने उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि मशरूम एवं इसके उत्पादों को जन जन के थाली में पहुंचा कर स्वस्थ परिवार व स्वस्थ समाज के साथ-साथ स्वस्थ राष्ट्र की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। जिसमें युवाओं की भूमिका अहम होगी।
पंचतंत्र सभागार में रविवार को आयोजित प्रशिक्षण के समापन समारोह के विधिवत उद्घाटन व अतिथियों के स्वागत के बाद प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए डॉ सिंह ने स्मार्ट शब्द का विश्लेषण करते हुए उद्यमिता के विभिन्न आयामों को बताया। साथ ही मशरूम के विभिन्न प्रभेदों की भी जानकारी दी।
डॉ रत्नेश कुमार झा ने अपने संबोधन में किसानों की समृद्धि केलिए मशरूम उत्पादन को विश्वसनीय साधन बताते हुए कहा कि एक समय मशरूम का उत्पादन शुन्य पर था लेकिन आज मशरूम के उत्पादन में बिहार देश में प्रथम स्थान पर है। इस क्रम में उन्होंने मशरूम वैज्ञानिक डॉ दयाराम की भूमिका को सराहनीय बताया।
अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन के दौर में मशरूम की खेती को लाभकारी बताते हुए उन्होंने ने कहा कि सेहत, स्वाद, समृद्धि का बेजोड काॅम्बो है खेती बिना खेत मशरूम।
डॉ पीके झा ने कहा कि प्रशिक्षु मशरूम उत्पादन व प्रसंस्करण में नवीनतम तकनीक को अपनाकर इस क्षेत्र में क्रांति को ला सकते हैं।
इसके पुर्व कुलगीत प्रसारण व प्रशिक्षण के समापन सत्र का उद्घाटन के बाद मशरूम वैज्ञानिक डॉ दयाराम ने अतिथियों व प्रशिक्षुओं का स्वागत करते हुए कहा कि बडे बडे होटलों और अमीरों की थाली में सजने वाला मशरूम आज गरीबों की थाली में सजने लगा है। इससे मशरूम की मांग में व्यापक उछाल आय है। आज सिर्फ भारतीय बाजार में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी मशरूम एवं इसके उत्पादों की व्यापक मांग है। एफपीओ से जुड़ कर मशरूम उत्पादों का लाभकारी विपणन सरलता से किया जा सकता है।
इस अवसर पर अड्डा एफपीओ कुढ़नी मुजफ्फरपुर के निरपेन्द्र शाही एवं अन्य प्रशिक्षुओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। अंत में प्रशिक्षुओं के बीच प्रमाण पत्र वितरित किया गया। इस 7 दिवसीय प्रशिक्षण में सैम हिंगंन वाटम युनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज नैनी उत्तर प्रदेश के छात्र छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ रामप्रवेश ने किया वहीं धन्यवाद ज्ञापन डॉ राजेश कुमार ने किया। मौके पर आदित्य शर्मा सहित सभी प्रशिक्षु उपस्थित थे।