
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। सरकार, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सहभागिता, जन–जागरूकता और जन सहयोग से ही बाल विवाह सहित सभा कुरीति को पूरी तरह से समाप्त करने में सफलता मिल सकती है। इस केलिए समुदाय स्तर पर निगरानी तंत्र को सक्रिय किया जाएगा।
मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सेवा सदन समस्तीपुर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार समीर कुमार के निर्देशन, आरंभ सात दिवसीय प्रशिक्षण सह संवेदीकरण कार्यक्रम को संबंधित करते हुए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मनोज कुमार ने उक्त बातें कही।
उद्घाटन और विषय प्रवेश :
अतिथियों के स्वागत सम्मान और संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डालसा सचिव मनोज कुमार ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि, “समाज को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से मुक्त करने के उद्देश्य से आज “100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” का शुभारंभ किया गया।”
“इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक करना, बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराना तथा इसे जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना है।”
स्वस्थ और मजबूत समाज निर्माण में सबसे गंभीर खतरा :
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के लिए ही नहीं बल्कि स्वस्थ एवं मजबूत समाज या राष्ट्र निर्माण केलिए गंभीर खतरा भी है। विशेष रूप से बालिकाओं के जीवन पर इसका दुष्प्रभाव लंबे समय तक पड़ते हैं।
बाल विवाह मुक्त भारत का लिया संकल्प :
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प के साथ बच्चों के सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त भविष्य के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व डालसा के विद्यानंद चौधरी ने यह कार्यक्रम का संचालन आशा सेवा संस्थान के सचिव अमित कुमार वर्मा ने किया।
समाजसेवियों और अधिवक्ताओं ने भी किया संबोधित :
इस अवसर पर पर बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रंजू कुमारी, सदस्य विजय कुमार शर्मा, पुलिस निरीक्षक मोहन कुमार, सिविल सोसाइटी समस्तीपुर के अध्यक्ष केशव किशोर प्रसाद, प्रयास संस्था के सोनेलाल ठाकुर, प्रभात कुमार, पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।