
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क पूसा । प्राकृतिक खेती वैदिक काल से चली आ रही परंपरा है। बेतहाशा बढती आबादी के बीच खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनने के प्रयास में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग ने समय के साथ हमारी भूमि की उपजाऊ शक्ति को नष्ट कर दिया। अब जरूरत है अपनी धरती को पुनर्जीवित करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने की जरूरत है, इसकेलिए आवश्यकता है प्राकृतिक खेती की ओर पुनः लौटने की।
सोमवार को डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के विद्यापति सभागार में प्राकृतिक खेती मिशन के तहत कृषि सखियों के लिए पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डाॅ पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही।
इस क्रम में उन्हांेने कृषि सखियों की भूमिका को भविष्य की दिशा दिखाने वाली बताते हुए कहा कि हर दौर में किसी भी बडे बदलाव का नारी शक्ति ने सफलता पूर्वक नेतृत्व किया है। इस आधार पर यह कहना या मानना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज की ये कृषि सखियाँ कल प्राकृतिक खेती की पथ प्रदर्शक बनेंगी और कृषि क्षेत्र में क्रांति लाएँगी।

बताते चलें कि डॉ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय में कृषि सखियों के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम कुलगीत प्रसारण के उपरांत आगत अतिथियों के स्वागत सम्मान के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीएस पांडेय एवं आगत अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर अगामी 12 सितंबर तक चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डाॅ पाण्डेय नेे प्राकृतिक खेती विद्यालय के स्नातक छात्रों को भी इस दिशा में आगे आने का आह्वान किया और आशा व्यक्त की कि छात्र भविष्य में प्राकृतिक खेती के विज्ञान को विश्व स्तर पर प्रचारित व प्रसारित करेंगे। क्रार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ तिवारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस.एस. प्रसाद ने किया।
इस अवसर पर स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. मयंक राय, निर्देशक अनुसंधान डॉ ए.के. सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी, समस्तीपुर, डॉ सुमित सौरव अधिष्ठाता मात्स्यिकी महाविद्यालय डॉ पीपी श्रीवास्तव, अधिष्ठाता, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय डॉ. उषा सिंह, निदेशक शिक्षा डॉ. यू.के. बेहरा, डॉ. आर. के. झा, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. शंकर झा सहित शिक्षक वैज्ञानिक उपस्थित थे।