
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “भू–गर्भ जल के स्तर में लगातार गिरावट बेहद चिंता का विषय है। जल हमारी जीवनरेखा है तथा उसके संरक्षण में विज्ञान एवं अनुसंधान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण तो है ही, भू–गर्भ जल को रिचार्ज करने के लिए जलाशयों के संरक्षण को लेकर जन जागरूकता और सामाजिक स्तर पर सामूहिक प्रयास भी उतना ही जरूरी है।
अभी से करना होगा प्रयास :
विश्व जल दिवस- 2026 के अवसर पर समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा मंगलवार एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसके उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार सिंह ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि, “अगली पीढ़ी को जीरो वाटर डे या कहें जल शून्य दिवस का सामना नहीं करना पड़े इसकेलिए अभी से ही प्रयास करना होगा।”
समाधान पर हुई विस्तृत चर्चा :
जल संरक्षण, गुणवत्ता और सतत उपयोग पर छात्रों, शिक्षकों तथा स्थानीय विज्ञान समुदाय को जागरूक के उद्देश्य से आयोजित जल और लैंगिक समानता विषयक इस संगोष्ठी में जल प्रदूषण, जल पुनर्चक्रण, सामुदायिक भागीदारी और शोध-आधारित समाधान जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
जल और लैंगिक समानता :
इस अवसर पर मुख्य वक्ता हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. महेश कुमार चौधरी ने बताया कि, “वैश्विक स्तर पर बढ़ते जल संकट को देखते हुए जल-संरक्षण हेतु जन जागरूकता की आवश्यकता को देखते हुए हर वर्ष अलग अलग थीम पर विश्व जल दिवस का आयोजन किया जाता है। इसके तहत इस वर्ष थीम- जल एवं लिंग (Water And Gender) या ‘जल और लैंगिक समानता’ (Water and Gender Equality) रखी गई है।”
छात्रों के लिए प्रेरणादायक संगोष्ठी :
डॉ. चौधरी ने बताया कि, “यह थीम जल संरक्षण में महिलाओं की भूमिका और जल तक उनकी समान पहुंच पर केंद्रित है। यह थीम जल संसाधनों के प्रबंधन में महिलाओं और लड़कियों पर पानी की कमी के असमान प्रभाव और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी को रेखांकित करती है।” उन्होंने कहा कि, “जीरो वाटर डे की स्थिति से बचने केलिए जल-संरक्षण तकनीकों और रसायन विज्ञान क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधानों की जानकारी के लिए यह संगोष्ठी छात्रों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है।”
संचालन और संगोष्ठी की सफलता में योगदान :
मंच संचालन डॉ. कविता रावत ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कमलेश कुमार मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों तथा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया और एकता व जल संरक्षण के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में दिलखुश कुमार, अंकित कुमार, विनय कुमार, रूपेश कुमार, आयुष कुमार, जितेंद्र कुमार, चांदनी कुमारी, गजाला, सुप्रिया कुमारी आदि छात्र–छात्राओं का विशेष योगदान रहा।