
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । अब ऑन लाईन मार्केटिंग से मशरूम और मशरूम के उत्पादों को जोडने की जरूरत है। इससे मशरूम उत्पादकों को वैश्विक बाजार मिलेगा। साथ ही उनके उत्पादों का समुचित मुल्य भी मिलेगा। जिससे उनकी समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। एफपीओ माॅड्युल में मशरूम उत्पादन पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए निदेशक अनुसंधान डाॅ अनिल कुमार सिंह ने उक्त बातें कही।

स्वागत और उद्घाटन की औपचारिकता के बाद अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि, आज मशरूम उत्पादन में बिहार पूरे देश में शीर्ष पर है। कभी सिर्फ सर्दियों में या ठंडे प्रदेशों में उगाया जाने वाला मशरूम आज बिहार के सभी जिलों में हर मौसम में उगाया जाता है। आज पूरे देश में बारहो महीने इसके सभी छह प्रभेदों की खेती हो रही है। जिससे ग्रामीण इलाकों में खास कर महिलाओं की स्थिति में व्यापक बदलाव आया है।

श्री सिंह ने कहा कि एफपीओ के माध्यम से मशरूम एवं इसके विभिन्न उत्पादों को ऑनलाइन मार्केटिंग से जोड़ने का समय है। जिससे किसानों को कम लागत व कम समय में अपने उत्पादों केलिए विश्व स्तरीय बाजार मिल सके। इसमें एफपीओ एक बेहतर और मजबूत विकल्प है। उन्होंने बताया कि बिहार में मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में दर्जनाधिक पंजीकृत एफपीओ संचालित हैं। सभी एफपीओ में हजारों की संख्या में मशरूम उत्पादक जुड़े है।
बताते चलें कि डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित एडवांस सेन्टर ऑफ मशरूम रिसर्च, में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वित्त पोषित अनुसूचित जाति उप परियोजना के अन्तर्गत मशरूम के मूल्यवर्धक उत्पादों द्वारा अनुसूचित जाति के लोगों के उद्यमिता विकास केलिए एफपीओ माॅड्यूल में मशरूम उत्पादन तकनीक विषयक 5 दिवसीय प्रशिक्षण प्रमाण पत्र एवं मशरूम किट वितरण के साथ संपन्न हो गया। जिसका संचालन डाॅ सुधानंदनी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन मशरूम मैन डाॅ दयाराम ने किया। मौके पर एडीआर डाॅ एसएन ठाकुर, सुभाष कुमार, मुन्नी, निशा आदि मौजूद थे।


