
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “एडी-कोवेरियंस टॉवर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में विश्वविद्यालय के प्रयासों का एक अहम पड़ाव है। इससे वायुमंडल, मिट्टी और वनस्पति के बीच जटिल अंतःक्रियाओं को समझने में मदद मिलेगी तथा इससे जलवायु प्रतिरोधी कृषि प्रणालियों के विकास को गति और जलवायु परिवर्तन अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।”
बुधवार को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज ऑन क्लाइमेट चेंज में स्पेस एप्लिकेशन सेंटर, इसरो के सहयोग से स्थापित अत्याधुनिक एडी-कोवेरियंस टॉवर का उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने उक्त बातें कही।
जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया को समझने और उसके दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक :
बताते चलें कि, एडी-कोवेरियंस टॉवर एक उन्नत वैज्ञानिक प्रणाली है, जिसके माध्यम से वायुमंडल और भूमि सतह के बीच गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प तथा ऊष्मा के आदान-प्रदान का सटीक मापन किया जाता है। यह तकनीक जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया को समझने और उसके दुष्प्रभावों को कम करने हेतु रणनीति विकसित करने में सहायक होगी।
मिट्टी, जल और वायु से संबंधित 32 मापदंडों की सतत निगरानी :
अत्याधुनिक सेंसर और उपकरण से लैस यह टॉवर, मिट्टी, जल और वायु से संबंधित कुल 32 मापदंडों की सतत निगरानी करता है। इनमें प्रमुख रूप से मिट्टी की नमी और तापमान, वायु तापमान एवं आर्द्रता, हवा की गति और दिशा, कार्बन डाइऑक्साइड एवं जलवाष्प फ्लक्स, संवेदनशील एवं अव्यक्त ऊष्मा फ्लक्स, नेट रेडिएशन, फोटोसिंथेटिकली एक्टिव रेडिएशन (PAR), मिट्टी ऊष्मा फ्लक्स तथा मिट्टी श्वसन शामिल हैं।
दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक :
इस अवसर पर निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि यह टॉवर विभिन्न कृषि प्रणालियों की कार्बन सेक्वेस्ट्रेशन क्षमता के आकलन में सहायक होगा। इससे कार्बन सिंक बढ़ाने की रणनीतियां विकसित की जा सकेंगी, जो जलवायु परिवर्तन के शमन और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
जलवायु अनुकूल खेती अपनाने में होंगे सक्षम :
उन्होंने कहा कि, इस टॉवर से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग जलवायु-स्मार्ट कृषि के लिए मॉडल और निर्णय समर्थन उपकरण विकसित करने में किया जाएगा, जिससे किसान बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती अपनाने में सक्षम हो सकेंगे।
कई पदाधिकारी व वैज्ञानिक थे मौजूद :
उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय एवं एसएसी इसरो सहित विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और शोधकर्ता उपस्थित रहे।