
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। बिहार विधानसभा हेतु आम चुनाव 2025 की प्रशासनिक तैयारियां अपने चरम पर हैं। शत प्रतिशत, स्वतंत्र, निष्पक्ष, एवं पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए बैठकों व समीक्षा बैठकों का सिलसिला भी लगातार जारी है। इन सबके बीच एक सवाल भी फिजां मै तैर रहा है क्या सच में निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन पदाधिकारी और प्रशासन निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने को लेकर गंभीर है?
एसआईआर को लेकर सवाल पूछने पर निर्वाचन पदाधिकारी का भड़क जाना, करीब 11 सालों से जिला मुख्यालय में जमे पदाधिकारी तबादला नहीं होना कुछ और ही कहानी कहते प्रतीत होते हैं।
जी हाँ! चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में एसआईआर के परिणाम से जुड़े सवाल पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी भड़क गए थे। वहीं जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी मनीष कृष्ण विगत करीब 11 सालों से जमे हैं, जबकि शेष सभी पदाधिकारी, किरानी, यहाँ तक कि चपरासी का भी एक निश्चित अंतराल पर तबादला होता रहा है।
बताते चलें कि, लोकसभा चुनाव के समय तत्कालीन जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी समस्तीपुर आशुतोष सिंह के तबादले के बाद श्री कृष्ण को प्रभार दिया गया था, तब वे सहायक जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित थे। इस प्रकार वे बीते 11 सालों में तीन लोकसभा ओर दो विधानसभा चुनाव करा चुके हैं। किसके आदेश से या किसकी कृपा से श्री कृष्ण का तबादला टाला जाता है यह सवाल तो बनता है।
माना यह जा रहा है कि किसी दल विशेष के बड़े नेता की कृपा से हर बार श्री कृष्ण के तबादले को टाल दिया जाता है। बहरहाल जिला निर्वाचन पदाधिकारी और चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव को लेकर कितना गंभीर है यह तो आनेवाला समय बतायेगा।