
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। एसआईआर चुनाव आयोग से लेकर जिला निर्वाचन विभाग तक का नासूर बन गया है। यह वह दुखती रग है जहां उंगली पड़ने मात्र से चुनाव आयुक्त से लेकर जिला निर्वाची पदाधिकारी तक तिलमिला जाते हैं।
ऐसा ही वाकया नमूदार हुआ जब जिलाधिकारी सह जिला निर्वाची पदाधिकारी रोशन कुमार कुशवाहा ने चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद संवाददाता सम्मेलन बुलाया। चुनाव आयोग निर्देश पर चुनाव से संबंधित जानकारी साझा करने हेतु बुलाए गए इस पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस को जिला निर्वाची पदाधिकारी रौशन कुशवाहा और पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
अपने संबोधन में दोनों पदाधिकारियों ने चुनाव के तारीख एवं आदर्श आचार संहिता लागू होने की जानकारी दी। साथ ही इस दौरान मौजूद मीडिया कर्मियों से फेक एंड पेड न्यूज से बचने और लोकतंत्र के महापर्व को भयमुक्त वातावरण में निष्पक्ष, शांति पूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने में सहयोग की अपील की।
संबोधन के बाद एक राष्ट्रीय समाचार समूह के संपादक राज कुमार राय ने जिलाधिकारी सह निर्वाची पदाधिकारी से मतदाता सूची गहन जांच एसआईआर के बारे में जानना चाहा कि,
कितने मतदाता के नाम काटे गए हैं और कितने मतदाता के नाम जोड़े गए हैं। साथ ही पूछा कि क्या जांच के क्रम में घुसपैठिये की भी कोई सूची प्राप्त हुए है?
इतना सुनते ही जिलाधिकारी भड़क गए और कहा कि आप अपना परिचय दें। परिचय जानने के बाद उन्होंने कहा कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख अखबार से जुड़े संवाददाताओं को बुलाया गया था, आपको किसने बुलाया। इस प्रकार प्रश्न का जवाब नहीं देकर उन्होंने बात की दिशा बदल दी।
बताते चलें कि परिचय नहीं होने की बात पर श्री राय ने कहा कि आपके आए करीब 10 महीने हुए हैं परंतु आज तक एक भी मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं बुलाया गया है। इसलिए अधिकांश संवाददाताओं से आपका का परिचय नहीं हो सका। इस केलिए जिम्मेदार कौन है?
उल्लेखनीय है कि जिलाधिकारी के मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं किए जाने के कारण तमाम विभागों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। केवल ठेकेदारों/माफियाओं के माध्यम से अधिकारियों द्वारा विभिन्न योजनाओं में सरकार की राशि की बंदरबांट होता रहा है। सवाल कृषि का हो चाहे आंगनबाड़ी का, प्रधानमंत्री आवास योजना का मामला हो या किसी अन्य योजना का पैसे की निकासी हो जाती है और जमीन पर काम नहीं दिखता।
इस बात की शिकायत किए जाने पर भी मामला ठंडा अवस्था में डाल दिए जाते हैं। जनता की शिकायत इन तक पहुंचती नहीं, संवाददाता को ये पहचानते नहीं, ऐसे में यह सबसे बड़ा सवाल है कि श्री कुशवाहा के नेतृत्व में बिहार विधानसभा चुनाव कितना निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण होगा।