
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। पिछले कुछ सालों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठ रहे हैं। सदन में और सदन के बाहर सार्वजनिक मंचो पर महिलाओं को लेकर अशोभनीय टिप्पणी, राष्ट्रगान के दौरान हंसी मजाक सहित विभिन्न कारणो से वे सुर्खियों में रहते हैं। जन सुराज और मैं खुद पिछले 2 महीने से हर मंच से सरकार से अपील कर रहा हूं कि नीतीश कुमार के मानसिक स्वास्थ्य की जांच होनी चाहिए। शनिवार शाम एक निजी परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने उक्त शब्दों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग कर डाली।


उन्होंनें कहा कि बीपीएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान उन्हें पता चला कि नीतीश जी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि वे न तो विषयों को समझ पा रहे हैं और न ही यह जान पा रहे हैं कि जिस राज्य के वे मुख्यमंत्री हैं, वहां क्या चल रहा है। किसी प्रदेश के मुख्य मंत्री की यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।


इतना तो आप भी उनको देख कर समझ सकते हैं कि वे शारीरिक तौर पर थके हुए और मानसिक तौर पर बीमार हैं। चूँकि वह सरकार चलाने और फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।


इसी क्रम मे पीके ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि उनके सहयोगी भाजपा भी इस बात से वाकिफ हैं कि नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। लेकिन सिर्फ दिल्ली की सरकार चलाने के लिए वे बिहार की जनता के साथ अन्याय कर रहे हैं।



पत्रकारों द्वारा महागठबंधन पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि पहले महागठबंधन तो बन जाने दीजिए। अभी तो यही पता नहीं है कि महागठबंधन में कौन-कौन सी पार्टियां हैं कौन कौन नहीं। अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। चुनाव तक महागठबंधन में खींचतान जारी रहेगा।


शराब बंदी को लेकर लग रहे आरोपों और आलोचना के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शराब बंदी बिहार को आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश थी। इससे करीब 20हजार करोड़ सलाना राजस्व की क्षति बिहार के खजाने को है। जबकि शराब शराब बंद हुआ ही नहीं। उलटा बंदी की आड में शराब और शराब के रूप में जहर का कारोबार ठेके और दुकानो से निकल कर घर-घर में फैल गया है। पीके ने कहा जरा सोचिए ये बीस हजार करोड़ हमारे होते तो बिहार में औद्योगिक क्रांति लायी जा सकती थी।
आलोचकों को कटघरे में लाते हुए पीके ने कहा कि यदि सच में शराब बंदी से फायदा है तो सिर्फ बिहार क्यों शराब बंदी का फायदा देश के सभी राज्यों को मिलना चाहिए। पूरे भारत में शराब बंदी का फरमान क्यों नहीं जारी करती है सरकार।
