
ओईनी न्यूज नेटवर्क
समस्तीपुर (एसएनबी)। कृषि के उत्थान केलिए केन्द्र व राज्य सरकारों के द्वारा विभिन्न योजनाओं पर काम चल रहा है। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सांख्यिकी की अहम भूमिका होगी। विज्ञान की दुनिया में डाटा और डाटा एनालिसिस की अहम भूमिका है। डाटा के बगैर विज्ञान और किसान के विकास की कल्पना करना भी बेहद दुश्कर कार्य है।
भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी के तीन दिवसीय प्लैटिनम जुबली कांफ्रेंस के अवसर पर उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री बिहार के कृषि सलाहकार और भारत सरकार के पूर्व कृषि सचिव और डीजी आइसीएआर डॉ मंगला राय ने उक्त बातें कही।



उन्होंने कहा कि आपने किसी की आय दोगुनी कर दी, किसी की चैगुनी कर दी। मगर उत्पादन तो दोगुनी चौगुनी नहीं हुई फिर आय कैसे दोगुनी चौगुनी हो गई। यह सोचने की बात है बिना उत्पादन बढे किसानो की आय कैसे बढी। क्या वास्तव में आय इस अनुपात में बढे। यह सब वास्तव में आंकडों की बाजीगरी है।



अनुसंधान में नवाचारों के प्रयोग के महत्व को चिन्हित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां मिर्च का प्रयोग मसाले में होता है। मगर दूसरे देशों में इसके तीखेपन का कोई महत्व नहीं। वे इसके विभिन्न अवस्थाओं के रंगों का प्रयोग लिप्स्टिक आदि सौंदर्य प्रसाधन बनाने मे करते हैं। हमारे यहां 20 से 100 रूपये प्रति किलो बिकने वाले मिर्च से बना यह लिप्स्टिक 100 डाॅलर से 1000 डाॅलर तक में बिकता है।



डाॅ राय ने कहा कि अनुसंधान में नवाचार में रिस्क है। बेशक रिस्क है। मगर सोचिए रिस्क कहां नहीं है? आप घर में बैठे रहें, कुछ न करें तो क्या रिस्क नहीं है। मोर वर्क मोर रिस्क, लेस वर्क लेस रिस्क, तो ठीक है मगर नो वर्क नेा रिस्क की गारंटी भी तो नहीं है।


अपने संबोधन मे डाॅ राय ने कहा कि वैज्ञानिक रिस्क लेंगे तो कृषि और किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आयेगा। मै विश्वविद्यालय से आग्रह करूंगा कि आपके यहां से पास आउट छात्रों में फौलाद और कोमलता का संगम हो। उनमें वज्र की तरह अचूक प्रहार करने की क्षमता हो तो साथ ही किसानों की पीडा, उनका दु:ख देख कर द्रवित होने वाला फूलेां की तरह नाजुक व संवेदनशील हृदय वाले हों। यदि ऐसा हो सका तो वहीं से अनुसंधान में नवाचार का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा।




