
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । विगत कुछ वर्षों से श्री अन्न (मिलेट्स) की माँग बढ़ी है। इनके मूल्य वर्धित उत्पादों की बाजार में उपलब्धता भी सुनिश्चित हो रही है। लोगों में सेहत के प्रति बढी जागरूकता के कारण अब मिलेट्स को भारतीय व्यन्जनों में गिना जाने लगा है। वहीं इसे भोजन में आम आदमी शामिल भी करने लगे है।





मुख्य अन्वेषिका-सह-संयोजक, श्री अन्न परियोजना, डाॅ श्वेता मिश्रा ने सोमवार को लघु कदन्न फसलों (श्री अन्न) का बीज उत्पादन तकनीक विषयक तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करने हुए उक्त बातें कही।


उन्होंने कहा कि यह पौष्टिकता के महत्व के प्रति जन जागरूकता के वजह से यह संभव हो पाया है। अतः श्री अन्न के माँग एवं उपलब्ता के अंतर कम करने की दिशा में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन कार्यक्रम निश्चित तौर पर मील का पत्थर साबित होगा। बताते चलें कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पोषक अनाज एवं मूल्य श्रृखला उत्कृष्ठता केन्द्र, डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा द्वारा आयोजित किया गया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए पाठ्यक्रम निदेशक डाॅ राजीव कुमार श्रीवास्तव, ने संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा किसानों द्वारा तथा किसानों के खेत पर उत्तम व गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन करने का सफल प्रयास किया गया है। जो श्री अन्न बीज के उपलब्धता मामले में आत्मनिर्भर बनाने दिशा में सार्थक साबित होगा। दिनांक 08-10 मार्च, 2025 तक चले इस प्रशिक्षण में शिवहर जिला के लगभग 35 महिला बीज उत्पादक किसानो ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समापन के अवसर पर प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र तथा श्री अन्न के बीज का पैकेट प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम का संचालन एवं स्वागत डाॅ रितम्भरा सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ कौशल किशोर ने किया। मौके पर डाॅ पुष्पा सिंह एवं डाॅ मिथिलेश कुमार सिंह के अलावा कई वैज्ञानिक व किसान उपस्थित थे।

