

ओईनी न्यूज नेटवर्क।
पटना । शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुझे यह देख कर खुशी हो रही है कि इस सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण व संवर्धन केलिए समर्पित प्राचीन कला केन्द्र और कला संस्कृति एवं युवा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बसंतोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उक्त बातें बिहार के कला संस्कृति मंत्री मोती लाल प्रसाद ने शुक्रवार को शहर के भारतीय नृत्य कला मंदिर में आयोजित बसंतोत्सव के उद्घाटन संबोधन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि कला संस्कृति विभाग इस तरह के आयोजन के माध्यम से प्रतिभावान कलाकारों को प्रोत्साहित करती रहती है। इस अवसर पर सबसे पहले कला एवं संस्कृति मंत्री मोती लाल प्रसाद, प्राचीन कला केन्द्र चंडीगढ के सचिव सजल कौसर, झारखंड से पधारे सतीश कुमार शर्मा, एवं भाजपा कला संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष वरुण कुमार ने केन्द्र के संस्थापक गुरू एमएल कोसर के समक्ष करतल ध्वनि के बीच संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं गुरू कोसर के तस्वीर पर माला अर्पित कर आयोजन को दिशा दी।




कार्यक्रम का संचालन यामिनि शर्मा ने किया। उद्घाटन की औपचारिकता के बाद केन्द्र के सचिव श्री कोसर ने तमाम आगत अतिथियों को शाॅल, पुष्प गुच्छ, स्मृति चिन्ह आदि से सम्मानित व अभिनंदन किया।


तदुपरांत राग काफी में कैसी ये धूम मचाई रे के साथ डाॅ रागेश्री दास ने पिनाकी चक्रवर्ती के तबला, दिव्य ज्योति मुखर्जी के गिटार एवं तनिष धौलपुरी के सारंगी से ऐसा समां बांधा कि श्रोता घंटो स्वर ताल लय की संगीत सरिता में सम्मोहन की अवस्था मे मंत्रमुग्ध झूमते, डूबते उबरते रहे।


वहीं दूसरी प्रस्तुती के रूप में मोहित साहनी हारमोनियम और विनायक सहाय सारंगी संगति में प्रख्यात युवा तबला वादक शुभ महाराज एवं अभिषेक मिश्रा नें अपने तबला युगल बंदी में उंगलियों के जादू से अमिट छाप छोड़ी।



मौके पर क्षेत्रीय समन्वयक अभिषेक कुमार, बोकारो से डाॅ राकेश रंजन, समस्तीपुर से डाॅ संजय कुमार राजा, लक्ष्मी कान्त मेहता, सुविख्यात तबला वादक अख्तर हुसैन सहित दर्जनों केन्द्र व्यवस्थापक व बडी संख्या में संगीत रसिक के साथ सुधी श्रोता भी मौजूद थे।