
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 पूसा। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली में किसान जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। किसानों को मौसम आधारित कृषि परामर्श प्रदान कर खेती को अधिक लाभकारी, सुरक्षित एवं टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला पुरुष किसानों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि का संबोधन :
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में मौसम परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में कृषि अनुसंधान, फसल उत्पादन तथा किसानों के लिए आवश्यक नवीन तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को ध्यान में रखते हुए कृषि पद्धतियों में सुधार एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग है।

स्वागत व उद्घाटन :
इस अवसर पर सर्वप्रथम वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली डॉ. आर. के. तिवारी, ने मुख्य अतिथि निदेशक अनुसंधान, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, डॉ. ए.के. सिंह, नोडल पदाधिकारी ग्रामीण मौसम सेवा डॉ. अब्दुल सत्तार, एवं एसोसिएट प्रोफेसर, पादप रोग विभाग डॉ. दिनेश राय का शॉल, पुष्प गुच्छ आदि से स्वागत अभिनन्दन किया। तत्पश्चात अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का परंपरानुसार उद्घाटन किया।
केवीके प्रमुख ने किया मार्गदर्शन :
कार्यक्रम के दौरान केवीके प्रमुख डॉ. रविंद्र कुमार तिवारी ने पशुओं पर मौसम के प्रभाव एवं मौसम के अनुसार पशु देखभाल की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की। डॉ. दिनेश राय ने मौसम परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाले फसल रोगों एवं उनके वैज्ञानिक प्रबंधन पर किसानों का मार्गदर्शन किया।
डॉ. अब्दुल सत्तार ने कहा :
कार्यक्रम में ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के नोडल पदाधिकारी डॉ. अब्दुल सत्तार ने ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करते हुए किसानों को अनिश्चित जलवायु परिवर्तन के दौर में मौसम आधारित कृषि की आवश्यकता, उपयोगिता एवं लाभों से अवगत कराया।
उद्यानिकी फसल में लाभ :
वहीं विषय वस्तु विशेषज्ञ केवीके बिरौली डॉ. धीरू तिवारी ने उद्यानिकी फसलों में मौसम आधारित तकनीकों को अपनाकर अधिक उत्पादन एवं लाभ प्राप्त करने के उपाय बताए।
धन्यवाद ज्ञापन :
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मौसम विशेषज्ञ डॉ गुलाब सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि, मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन एवं फसल सुरक्षा से संबंधित निर्णय लेकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल क्षति के जोखिम को भी कम कर सकते हैं।
कई लोग रहे मौजूद :
इस कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र से प्रेम कुमार, बसंत किशोर, रवि रंजन कुमार, जितेंद्र कुमार, चंदन कुमार, सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
