
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
रोसड़ा। आज हम उन योद्धाओं को याद करते हैं जिनके संघर्ष व बलिदान के कारण आज के ही दिन एक मई 1866 को दुनिया के मजदूरों के लिए काम के घंटे व छुट्टियां तय की गई। उसके पहले मजदूरों केलिए काम के घंटे तय नहीं थे। उनको समुचित मजदूरी, छुट्टियां आदि सुविधाएं नहीं दी जाती थीं।
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर 01 मई को यूआर कॉलेज, रोसड़ा के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. घनश्याम राय ने प्रधानाचार्य कक्ष में मजदूर दिवस पर आयोजित परिचर्चा के दौरान उक्त बातें कही। उन्होने कहा कि लम्बे संघर्ष और बलिदान के बाद मजदूरों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र संघ की मुहर लगी थी।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में शहीद हुए लोगों को और समाज में मजदूरों के योगदान ससम्मान देने केलिए मजदूर दिवस मनाते हैं। इसे मई दिवस, शौर्य दिवस और विजय दिवस भी कहा जाता है।
इस क्रम में सर्वप्रथम उन संघर्षशील योद्धाओं को पुष्पांजली देकर श्रद्धांजली अर्पित की गई जिनके बलिदान से श्रमशील मजदूरों को उनका हक मिला। तदुपरांत डाॅ राय ने अगामी 17-18 मई को कॉलेज में प्रस्तावित दो दिवसीय सम्मेलन की तैयारी में योगदान दे रहे दिहाड़ी मजदूरों को माला पहनाकर व मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। जिसमें गार्ड, सफाई कर्मी, व अन्य मजदूर शामिल थे।
इस अवसर पर डाॅ विनय कुमार ने कहा कि यह दिन मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और कामकाजी जीवन में सुधार लाने के लिए मनाया जाता है। वहीं छात्र कुमार गौरव ने कहा कि आज के दिन मजदूर के योगदान को याद करना और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना है।
इस अवसर पर कॉलेज के प्राध्यापक डॉ श्याम सुंदर शर्मा, डॉ सतीश कुमार, डॉ अमरेश कुमार सिंह, दिहाड़ी मजदूर सुभाष सिंह, उपेंद्र प्रसाद, सुनील, सुजीत, जीतू, गब्बर सिंह, उपेंद्र राम, अंकित कुमार, छात्र क्रमशः कुमार गौरव, अभिषेक सिंह, दिलखुश राज, रमन कुमार, विकेश कुमार आदि उपस्थित थे।
