
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के बीज एवं प्रक्षेपण निदेशक डॉ डीके राय एवं तिरहुत कृषि महाविद्यालय ढोली के प्रधान वैज्ञानिक डॉक्टर राजेश कुमार ने शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र जाले का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने गेहूं एवं अन्य फसलों के बीज उत्पादन प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया।
इस बाबत जानकारी देते हुए प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ चंदन कुमार ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में दलहन, तिलहन, खाद्यान्न फसल एवं उद्यानकी फसलों के गुणवत्ता युक्त बीज एवं पौधे तैयार किए जाते हैं। जिसका समय-समय पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी एवं राज्य सरकार के पदधिकारियों के द्वारा निरीक्षण कर गुणवत्ता को बनाए रखने हेतु सुझाव दिया जाता है।
इस अवसर पर केवीके जाले अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर ने बताया कि वर्तमान में दलहन एवं तिलहन फसलों के फसल की कटाई हो चुकी है। 3.5 हेक्टेयर में गेहूं की HD 2967 प्रभेद के आधार बीजों तैयार अवस्था में है। आम अमरूद लीची एवं नींबू के लगभग 1000 पौधे किसानों को जून में उपलब्ध कराए जाएंगे। इस दौरान खरीफ फसल के बीज उत्पादन योजना, रबी फसलों की उपलब्धि एवं गरमा फसलों के बुआई पर चर्चा तथा खरीफ फसलों की कार्य योजना तैयार की गई।

इस क्रम में डॉ राजेश कुमार ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र में लगाए गए गेहूं बुआई की विभिन्न पद्धति जैसे जीरो टिलेज, हैप्पी सीडर विधि, लाइन शोइंग एवं पारंपरिक विधि काफी प्रसंसनीय है। जिसका प्रत्यक्षण कर किसान अपने लिए उपयुक्त पद्धति का चयन कर सकते हैं।
वहीं डॉ डीके राय ने किसानों को सुझाव दिया कि अच्छी उत्पादकता के लिए गुणवत्ता युक्त बीज एवं प्रभेदों का चयन आवश्यक है। अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए किसानों को मध्य अवधि के प्रभेदों का चयन करना चाहिए। यथा संभव वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार समय से फसलों की बुवाई करनी चाहिए।
