
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । जैसे जैसे चुनाव के दिन करीब आते जा रहे हैं फिंजा में चुनावी रंग चढता जा रहा है। चैक-चैराहों पर, चाय-पान की दुकानों पर, बैठक चैपालो पर जहां भी 4 लोग जुटे कि चुनाव की चर्चा शुरू हो जाती है। अभी बातचीत का लब्बोलुआब चुनावी माहौल की संभावनाओं और संभावित प्रत्याशियों पर ही केन्द्रित है।
समस्तीपुर विधानसभा की बात करें तो फिलहाल समस्तीपुर विधानसभा सीट पर समाजवादियों का एकाधिकार है। विगत तीन बार से राष्ट्रीय जनता दल के अख्तरूल इस्लाम शाहीन जीत कर विधानसभा जा रहे हैं। शाहीन के जीत का कारण उनके विरूद्ध शीर्ष नेतृत्व द्वारा कमजोर उम्मीदवार देना बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों में चर्चा आम है कि समस्तीपुर में समाजवादी नेताओं का बोलबाला रहा है। विगत चुनाव में जदयू प्रत्याशी अश्वमेध देवी को करीब 4700 मतों से पराजय मिली थी। लोगों का मानना है कि अश्वमेध देवी वीवीआईपी कल्चर की शिकार हैं। आम लोगों में उनकी पहुंच और पकड काफी कमजोर है। वो तो पार्टी के नाम पर उन्हें वोट मिल गया था। लकिन वीवीआईपी होने के कारण उपजा जनाक्रोश उनकी हार का कारण बना।
लोगों से जब संवाददाता ने जदयू और राजद की संभावना प्रतिशत की बात कही तो उन्होंने छूटते ही कहा कि यह तो इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी ने टिकट किसे दिया। यदि जदयू ने राजनीति की दुनिया में नये मगर जनता के बीच मजबूत पकड वाले सुविख्यात समाजसेवी डाॅ मनोज कुमार सिंह को टिकट दिया तो जीत का प्रतिशत जदयू के पक्ष में जा सकता है।
वहीं यह भी देखना होगा कि इंडिया गठबंधन राजद के परंपरागत सीट पर वर्तमान विधायक पर ही अपना दाव खेलती है या कांग्रेस के सन्नी हजारी, अनीता राम पर या फिर किसी नये प्रत्याशी पर भरोसा जताती है। शाहीन के प्रति लोगों में व्याप्त असंतोष जदयू की जीत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। अगर उनकी जगह इंडिया गठबंधन ने किसी नये प्रत्याशी पर दांव खेला तो मामला दिलचस्प होने के प्रबल आसार बनेंगे।
लोगों के मुताबिक डाॅ मनोज सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर, समय समय पर जरूरत मंदों की सहायता आदि गतिविधियों से लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। ऐसे में उनका चुनाव में उतरने की खबर ही इंडिया गठबंधन सहित विपक्ष के सभी दावेदारों की नींद उडाने केलिए काफी है।