
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
सुरेन्द्र कुमार, सचिव जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, समस्तीपुर।
उपर की तस्वीरों को देखिये, दोनों तस्वीरों का अनोखा साम्य मन को एक अद्भुत अहसास से गदगद कर देता है।पहली तस्वीर राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले और क्रांतिकारी फातिमा शेख की है। जिन्होंनें तमाम समाजिक गतिरोध के विरुद्ध अपना घर और परिवार त्याग कर लड़कियों की शिक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। आज उसी का देन है कि लड़कियाँ घर के किचन और श्रृंगार तक सीमित नहीं रही। वे प्रत्येक क्षेत्र में अपेक्षा से कहीं अधिक बेहतर करती नजर आ रही हैं।
दूसरी तस्वीर मां भारती के दो जांबाज बेटियों कर्नल सोफिया कुरेशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की है जिन्होने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के ऑपरेशन सिंदूर में बड़ी भूमिका निभाते हुए इतिहास रच रही हैं।
ये दोनो तस्वीरें पितृ सत्तात्मक सोच वाले समाज के लिए एक दर्शन भी है और महिलाओं के प्रति संकीर्ण दृष्टिकोण और सोंच बदलनें का संकेत भी है। बेशक आज अगर मनुस्मृति वाले मनु और तुलसीदास होते थे तो इस तस्वीर को देखते हीं बेहोश हो जाते।
सावित्री बाई फुले कहती थी कि महिलाओं का सबसे बड़ा गहना और सबसे बड़ी ताकत उसकी शिक्षा है क्योंकि शिक्षा हीं एक मात्र ऐसा हथियार है जिससे पूरी दुनिया को बदला जा सकता है।
यह बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के संविधान की देन है कि आज आज एक बेटी ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व कर रही है। वरना धार्मिक पुस्तकों में तो कभी महिलाओं को ढोल और पशु समान आदि कह कर न जानें कितना अपमानित किया गया। कभी दहलीज की जीनत, घर आंगन का श्रृंगार, आदि कह कर उनकी क्षमता योग्यता और सृष्टि संचालन मे अनुपम योगदान की अनदेखी करने की कुचेष्टा की गई।
करीब मध्यकाल के उत्तरार्द्ध से अस्तीत्व में आये पुरूष प्रधान समाज की मानसिकता महिलाओं के प्रति हमेशा से दोहरापन लिये रहा है। एक तरफ वह सरस्वती, लक्ष्म, काली, दुर्गा, गायत्री आदि के रूप में महिलाओं को पूजनीय कहता है, वहीं दूसरी तरफ घर-परिवार की महिलाओं को दासी समझ कर प्रताड़ित और अपमानित करता है। मौजूदा दौर में बेटियों व महिलाओं को पुरुष प्रधान विचारधारा को नई दिशा दिखाते देखना निसंदेह गर्वानुभूति कराने वाला है।
आज यह कहते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि हम आरंभ से अंत तक में भारतीय हैं और भारतीय रहेंगे। महिलाओं का श्रृंगार से संघर्ष करते हुए अच्छा लगता है।
(लेखक बाल संरक्षण, बचपन बचाओ अभियान, बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, और बेटी बचाओ अभियान में प्रखर व सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं)