
ओईनी न्यूजनेटवर्क।
पूसा । राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के परिसर स्थित विद्यापति सभागार सभागार में नेशनल टेक्निकल टेक्स्टाइल मिशन, वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत एग्रो टेक्स्टाइल पर केंद्रित विशेष पहल एवं साईलेज मक्का के बढ़ावा से जुड़े विषय पर आधारित एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
अतिथियों का शाॅल, पाग, स्मृति चिन्ह आदि से स्वागत, कुलगीत प्रसारण आदि औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद मुख्य अतिथि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के मंत्री गिरिराज सिंह, वीसी डाॅ पीएस पाण्डेय व अन्य आगत अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में श्री सिंह ने कहा कि नेशनल टेक्निकल टेक्स्टाइल मिशन एवं कृषि एक साथ मिलकर देश के विकास में काफी काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर नेशनल टेक्निकल टेक्स्टाइल मिशन एवं केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के बीच एक एमओयू साइन किया जा रहा है। जो ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि इसके अलावे विश्वविद्यालय एवं मसीना बीज प्रा. लिमिटेड के साथ साइलेज मक्का को बढ़ावा देने से जुड़े एक समझौता भी किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने मक्के का लगभग चौदह फीट उंचा एक नया प्रभेद साईलेज विकसित किया है जिसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर तीन सौ टन से ज्यादा है। जबकि अभी के वर्तमान प्रभेद का अधिकतम उत्पादन चालीस से पचास टन हैं। इसके अतिरिक्त मक्का के इस प्रभेद साईलेज में इथेनॉल का प्रतिशत अधिक है।
इस प्रभेद के विकास के लिए श्री सिंह ने कुलपति डॉ पीएस पांडेय और वैज्ञानिक डॉ मृत्युंजय कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से विश्वविद्यालय में काफी अच्छा कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को आक (मंदार) से धागा बनाने पर भी शोध करना चाहिए।
वहीं कुलपति डॉ पांडेय ने विश्वविद्यालय के डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में विकास की जानकारी दी और वस्त्र मंत्रालय को विश्वविद्यालय के साथ समझौता के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि, टेक्स्टाइल का माडर्न एग्रीकल्चर में क्या उपयोग हो सकता है इसका प्रदर्शन वस्त्र मंत्रालय के इस केंद्र के माध्यम से किया जायेगा।
वहीं उपस्थित बिहार विधान परिषद सदस्य सर्वेश कुमार ने कहा कि निश्चित ही साइलेज मक्का के प्रोत्साहन से बिहार के किसानों पशुपालकों को फायदा मिलेगा। वहीं कुलसचिव डॉ मृत्यु्जय कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित मक्का का यह नया प्रभेद साईलेज ऐतिहासिक है। इससे निश्चित ही किसानों की आय बढेगी।
उन्होंने बताया कि इसके पेटेंट की प्रक्रिया चल रही है इसलिए इस पर अनुसंधान परिषद की बैठक में विस्तार से चर्चा की जायेगी। इसके पुर्व निदेशक अनुसंधान ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय के अनुसंधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ कुमारी अंजनी ने किया। मौके पर मसीना बीज के अनिल मिश्रा, ससमीरा के अशोक तिवारी, निदेशक प्रसार डॉ मयंक राय, डीन बेसिक साइंस डॉ अमरेश चंद्रा, डीन इंजीनियरिंग डॉक्टर राम सुरेश वर्मा, डीन डॉ उषा सिंह, डॉ रत्नेश कुमार, डॉ मुकेश कुमार, डॉ महेश कुमार, डॉ शिवपूजन सिंह सहित शिक्षक वैज्ञानिक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।