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Home » तैयार फसलों की कटनी व दौनी में बेहद सावधान रहें किसान

तैयार फसलों की कटनी व दौनी में बेहद सावधान रहें किसान

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar11/04/2025No Comments3 Mins Read
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ओईनी न्यूज नेटवर्क।

समस्तीपुर। पिछले दिनों उत्तर बिहार के अनेक स्थानों पर तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हुई है तथा आगे भी वर्षा या बुंदा-बुंदी होने की सम्भावना है। इसे देखते हुए डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित जलवायू परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केन्द्र ने किसानी सलाह जारी किये हैं। जिसके अनुसार किसान भाईयों को गेहुँ एवं अरहर की तैयार फसलों की कटनी व दौनी में बेहद सावधान रहने की आवश्यकता है। खड़ी फसलों में कीटनाशकों का छिड़काव मौसम साफ रहने पर करें।

गरमा मूंग तथा उरद की बुआई वर्षा न होने की स्थिति में अविलंब संपन्न करें। खेत की जुताई में 20 किलो ग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम स्फूर, 20 किलोग्राम पोटाश तथा 20 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें। मूंग के लिए पूसा विशाल, सम्राट, एस०एम०एल०-668, एच०यू०एम०-16 एवं सोना तथा उरद के लिए पंत उरद-19, पंत उरद-31, नवीन एवं उत्तरा किस्में बुआई के लिए अनुशंसित हैं। बुआई के दो दिन पूर्व बीज को कार्बेन्डाजीम 2.5 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से शोधित करें। बुआई के ठीक पहले शोधित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करें। बीजदर छोटे दानों के प्रभेदों हेतु 20-25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा बड़े दानों के प्रभेदों हेतु 30-35 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। बुआई की दूरी 30×10 से०मी० रखें।

ओल की रोपाई करें। रोपाई के लिए गजेन्द्र किस्म अनुशंसित है। प्रत्येक 0.5 किलोग्राम के कन्द की रोपनी के लिए दूरी 75×75 से० मी० रखें। 0.5 किलोग्राम से कम वजन की कंद की रोपाई नहीं करे। वीज दर 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से रखें। बुआई से पूर्व प्रति गड्‌ढ़ा 3 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर, 20 ग्राम अमोनियम सल्फेट या 10 ग्राम युरिया, 37.5 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट एवं 16 ग्राम पोटेषियम सल्फेट का व्यवहार करे। ओल की कटे कन्द को ट्राइकोर्डमा भिरीडी दवा के 5.0 ग्राम प्रति लीटर गोबर के घोल में मिलाकर 20-25 मिनट तक डुबोकर रखने के बाद कन्द को निकालकर छाया में 10-15 मिनट तक सुखने दें उसके बाद उपचारित कन्द को लगायें ताकि मिट्टी जनित बिमारी लगने की संभावना को रोका जा सके तथा अच्छी उपज प्राप्त हो सके।

प्याज फसल में थ्रिप्स कीट की निगरानी करें। थ्रिप्स प्याज को नुकसान पहुँचानेवाला मुख्य कीट है। यह आकार में अतिसुक्ष्म होता है तथा यह पत्तियों की सतह पर चिपक कर रस चुसते है जिससे पत्तियों पर दाग दिखाई देते है जो बाद में हल्के सफेद हो जाते है। थ्रीप्स की संख्या अधिक पाये जाने पर प्रोफेनोफॉस 50 ई०सी० दवा का 1.0 मि०ली० प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड दवा का 1.0 मी.ली. प्रति 4 लीटर पानी की दर से घोलकर वर्षा न होने की स्थिति में छिड़काव करें।

भिण्डी की फसल में लीफ हॉपर कीट की निगरानी करे। यह कीट दिखने में सूक्ष्म होता है। इसके नवजात एवं व्यस्क दोनो पत्तियों पर चिपककर स्स चुसते है। पत्तियों पीली तथा पौधे कमजोर हो जाते है. जिससे फलन प्रभावित होती है। इसका प्रकोप दिखाई देने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि०ली० प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर वर्षा न होने की स्थिति में छिडकाव करें।

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