
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । मधु उत्पादन एक लाभकारी कृषि व्यवसाय है। इसकेलिए किसानों को शहद की मार्केटिंग और उचित मूल्य पाने के लिए प्रबंधन के गुर सीखना होगा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पंचतंत्र भवन सभागार में आयोजित मधु उत्पादन में वैज्ञानिक पद्धति द्वारा उद्यमों को मजबूत बनाने और मधु का मूल्य संवर्धन विषय पर आधारित छह दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने. उक्त बातें कही। इसके पुर्व परंपरानुसार अतिथियों के स्वागत सम्मान, कुलगीत प्रसारण एवं दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण का शुभारंभ किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन के क्षेत्र में उद्यमी बनाने को लेकर प्रशिक्षित करना है। ताकि मधुमक्खी पालक किसान अपने व्यवसाय को मजबूत बना सकें और अधिक आय अर्जित कर सकें।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रबंधन और मूल्य संवर्धन के कारण जो मधु विश्वविद्यालय में तीन सौ रुपए किलो बेचा जा रहा था, वो आज आठ सौ रुपए किलो तक बिक रहा है और देश भर में इसकी मांग इतनी है कि विश्वविद्यालय इसे पूरा नहीं कर पा रहा है।
कुलपति डॉ पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय मघु के जीआई टैगिंग को लेकर भी प्रयास कर रहा है और जीआई टैगिंग मिलने के बाद शहद के मुल्य में और बढ़ोतरी होगी जिससे किसानों को फायदा मिलेगा।
इस अवसर पर निदेशक अनुसंधान डॉ. एके सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों के हित में लगातार कार्य कर रहा है और मधु उत्पादक किसानों को विश्वविद्यालय से जुड़ कर अपना व्यवसाय बढाना चाहिए।
वहीं निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. मयंक राय ने कहा कि मधुमक्खी पालन एक कल्याणकारी व्यवसाय है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को संरक्षित रखने में सहयोग मिलता है, बल्कि फसलों और फलों के उत्पादन में भी वृद्धि होती है। कृषि व्यवसाय एवं ग्रामीण प्रबंधन संकाय के निदेशक डॉ. रामदत्त ने मधु के मूल्य संवर्धन के बारे में चर्चा की।
सहायक प्राध्यापक डॉ. मोहित कुमार के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. साईं रेड्डी ने किया। मौके पर कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ उदयन मुखर्जी, डॉ रश्मि सिन्हा समेत कई वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षु मौजूद थे।