
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। आम का फल मक्खी आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला कीट है, इससे किसानों को सावधान रहना चाहिए। फल मक्खी (फ्रूट फ्लाई) जिसे डासी मक्खी भी कहते है, ये फलों को नष्ट करने वाले आम के सबसे घातक कीटों में से एक है। डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कृषि विज्ञान केन्द्र, बिरौली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ आरके तिवारी ने किसानों को मौजूदा परिवेश में आम के फसल की देखभाल हेतु सावधानी से जुडी जानकारी साझा करते हुए उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि इसके कारण उत्पादन में लगभग 25-30 प्रतिशत से लेकर 75-80 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। किसानों को समय से इसका पता लगाने के साथ बचाव और निवारण करने पर ध्यान देना चाहिए। इस क्रम में केविके बिरौली के उद्यान विशेषज्ञ डॉ धीरु कुमार तिवारी ने बताया कि इस कीट का प्रकोप अप्रैल-मई के महीने में अधिक देखने को मिलता है। अगर किसान समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण कर लें तो इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।
डाॅ तिवारी ने कहा कि इसका वयस्क मक्खी घरेलू मक्खी के बराबर होते है, जिन पर पीले रंग की धारियां होती हैं। जब आम, आधे आकार के फल के रूप में तैयार हो जाते हैं, तो इसकी मादा अपने जीवनकाल में 300 से ज्यादा अंडे देती है। सफेद रंग के बिना पैर वाले इसके मैगट्स फल के गूदे को खाते हैं और फल को सड़ा देते हैं। इसके कारण फल गिरने लगते हैं। जिससे इसका लार्वा फिर वापस मिट्टी में चले जाता है और फिर से वयस्क के रूप में दिखाई देता है।
डाॅ तिवारी ने कहा कि समस्याग्रस्त फल बहुत जल्दी पक सकते हैं और गिर सकते हैं। प्रबंधन के लिए निरंतर जमीन पर गिरे हुए फल मक्खी से संक्रमित फलों को इकट्ठा करें और उन्हें 60 सेंटीमीटर गहरे गड्ढों में इकट्ठा करके दबा दें। बाग में स्वच्छता बनाए रखें और पेड़ों के आसपास के क्षेत्र से खरपतवार हटा दें। इस कीट के जैविक नियंत्रण हेतु नीम के तेल का 2 से 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए।
रासायनिक विधि से कीट प्रबंधन हेतु फल लगने के 45 दिन बाद से डेल्टामेथ्रिन 2.8 ई.सी 1.5 – 2 मिलीध्ली पानी अथवा डाइमेथोएट का 1 मिलीध्ली पानी का छिड़काव प्रभावी है। फल मक्खी की आबादी की निगरानी और प्रबंधन के लिए, प्रति एकड़ 6-8 फल मक्खी फेरोमोन ट्रैप (जाल) रखें। वयस्क फल मक्खियों को पकड़ने के लिए 1 एकड़ के बगीचे में 4 से 6 पीले चिपचिपे ट्रैप (जाल) लगाएं, जो अपने चमकीले रंग के कारण उनकी ओर आकर्षित होते हैं। इस मक्खी को नियंत्रित करने का सबसे कारगर उपाय मिथाइल यूजिनाल युक्त गंध ट्रैप है।
इस ट्रैप में एक विशेष प्रकार की टिकिया रखी जाती है जिसमे से मादा फल मक्खी की गंध आती है जिसकी वजह से नर फल मक्खी आकर्षित होकर ट्रैप में फंस जाते है और मर जाते है। नर और मादा फल मक्खी का सम्पर्क न होने से नयी फल मक्खियाँ नहीं तैयार हो पाती है जिसके कारण आम की फसल सुरक्षित हो जाती है। एक हेक्टेयर के लिये 15-20 ट्रैप की आवश्यकता होती है। इन ट्रैप को पेड़ की टहनियों में जमीन से 5-6 फीट की ऊँचाई पर लटका देना चाहिए। यौनगंध ट्रैप को एक माह के अंतर पर बदलना तथा एकत्रित मक्खियों को निकाल कर फेंक देना चाहिए।