
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। प्रशासनिक आदेश पर जन उत्साह हो भारी तो डीजे पर प्रतिबंध कैसे होगा प्रभावी। हर साल की तरह इस साल भी रामनवमी व दुर्गा पूजा को लेकर जिले में डीएम, एसपी, ने संयुक्त निर्देश जारी किये। विभिन्न थानों में थानाध्यक्ष भी शान्ति समिति की बैठक कर रहे हैं।हर बैठक में शान्ति पूर्वक निर्देशों का पालन करते हुए पर्व मनाने की बात की जाती है।
इसमें डीजे को पूर्ण रुप से प्रतिबन्धित बताते हुए डीजे के प्रयोग पर कड़ी कार्रवाई का जिक्र भी अनिवार्य रूप से होता है। मगर हर बार डीजे पर प्रतिबंध कागज में ही सिमट कर फाइल में ही दुबका रह जाता है। और हर बार प्रशासनिक आदेश निर्देश की अनदेखी कर डीजे का खुलेआम और जमकर प्रयोग होता है। गौरतलब है कि इसकी जानकारी पुलिस को भी है मगर आज तक किसी भी एक डीजे संचालक पर कार्रवाई होने की जानकारी नहीं है।
जानकार तो यह भी बताते है कि डीजे बजाने केलिए चढ़ावा भी चढ़ाना पड़ता है। तभी तो पुलिस कर्मी की मौजूदगी में डीजे बजता है, कई बार पुलिस कर्मी भी डीजे की धुन पर थिरकते दिख जाते हैं। फिर कार्रवाई कौन करेगा।
इस बाबत जब एक बार बजते डीजे पर निगरानी रखने वाले पुलिस कर्मी से पूछा गया तो उसने कहा क्या कीजियेगा, कौन सुनेगा, उत्साह और उमंग का माहौल है, हमको भी इसी समाजमें रहना है।
ये तो छोड़िये शादी, जनेऊ, मुंडन सहित विभिन्न अवसरों पर डीजे बजाने का जानलेवा फैशन सा चल पड़ा है। एक बार इस तरह के मामले में किसी डीजे संचालक एवं आयोजक के विरुद्ध सांकेतिक कार्रवाई भी हो जाय तो हालात पर नियंत्रण किया जा सकता है।
*क्यों है डीजे ख़तरनाक*
इस बाबत पूछे जाने पर म्युजिकोलाॅजिस्ट डाॅ संजय कुमार बताते हैं कि समान्यत: 30 से 50 डेसिबल तीव्रता वाली ध्वनि सहज श्रव्य होती हैं ये कानों को अच्छी लगती है। 50 डेसिबल से अधिक होने पर ध्वनि तकलीफदेह होने लगती है। जबकि डीजे से निकलने वाली ध्वनि तीव्रता कम से कम 70-75 डेसिबल होती है। जो सामान्य जन जीवन केलिए हानिकारक है। जबकि विभिन्न अवसरों पर बजने वाले डीजे की तीव्रता 110 से 120 डेसिबल तक पहुंच जाती है। डाॅ संजय ने बताया कि डीजे की ध्वनि से मस्तिष्क अस्त-व्यस्त हो जाता है, हृदय की गति अनियंत्रित हो जाती है, रक्त संचार प्रणाली बेकाबू हो जाती है। जिससे हृदयाघात, ब्रेन हैमरेज आदि का खतरा उत्पन्न हो जाता है। कई बार डीजे की तीव्र ध्वनि से मौत तक हो जाती है। आंकड़े गवाह हैं कि 60-70 डेसिबल या इससे अधिक तीव्रता वाली ध्वनि के बीच अधिक देर तक रहने से मनुष्य पागल तक हो सकता है।