
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर के विद्यापति सभागार में भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी का तीन दिवसीय प्लैटिनम जुबली कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम आगत अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से देश रत्न डाॅ राजेन्द्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन के बाद कुलगीत के प्रसारण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तदुपरांत अतिथियों का मिथिला की परंपरा के अनुसार शाॅल, पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत अभिनंदन किया गया।



काॅलेज आफ बेसिक साइंस के डीन डॉ अमरेश चंद्रा ने स्वागत संबोधन के दौरान कांफ्रेंस के मूल उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उद्घाटन सत्र में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि बिहार के मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार और भारत सरकार के पूर्व कृषि सचिव और डीजी आइसीएआर डॉ मंगला राय ने कहा कि कृषि से जुड़े शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को सांख्यिकी की तकनीकी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों को चाहिए कि वे आम लोगों को भी सांख्यिकी की समान्य जानकारी उपलब्ध करायें ताकि वे आंकडों की हकीकत को पहचान सकें।



डॉ राय ने कुलपति डॉ पांडेय के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय तेजी से प्रगति कर रहा है। महज दो वर्षों की अल्पावधि में विश्वविद्यालय ने बारह से अधिक पेटेंट हासिल किया है यह बडी उपलब्धि कही जा सकती है। यह अपने आप में सब कुछ कहने में सक्षम है। उन्होंने वैज्ञानिकों से एकजुट होकर कार्य करने की अपील की।


अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने कहा कि डाटा का काफी दुरूपयोग किया जा रहा है। सांख्यिकी विशेषज्ञों को डाटा की सत्यता और इसके दुरूपयोग को लेकर सचेत रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय डिजिटल एग्रीकल्चर की दिशा में काफी तेजी से कार्य कर रहा है। आने वाले कुछ महीनों में दस से अधिक सहायक प्राध्यापक डिजिटल एग्रीकल्चर से संबद्ध क्षेत्रों में बहाल किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में डाटा के संकलन को लेकर नयी मेथेडोलाॅजी और एल्गोरिद्म का निर्माण किया जा रहा है।


तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में सांख्यिकी के विभिन्न आयामों पर गहन मंथन किया जाएगा और जो निष्कर्ष निकाला जाएगा उसे पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित किया जाएगा। वहीं कांफ्रेंस के निष्कर्ष को नीति निर्माताओं से साथ भी साझा किया जाएगा ताकि उन्हें नीति बनाने में सहयोग मिल सके।



इस अवसर पर अपने संबोधन में भारतीय कृषि सांख्यिकी के प्रेसिडेंट डॉ पद्म सिंह ने कहा कि सांख्यिकी सोसायटी का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि इसकी स्थापना सर सीवी रमन के निर्देश पर की गई थी और इसके पहले सचिव भारत के प्रथम राष्ट्रपति देश रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद थे। उन्होंने कहा कि इस सोसायटी ने कृषि के विकास में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम को अखिल भारतीय सांख्यिकी सोसायटी के सचिव डॉ राजेन्द्र प्रसाद, भाषण दिया और ।

इस कांफ्रेंस में बीस से अधिक राज्यों के लगभग 250 से अधिक वरीय वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। मंच संचालन डॉ अंजनी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ महेश कुमार ने किया। मौके पर कुलसचिव डॉ मृत्युंजय कुमार निदेशक शिक्षा डॉ उमाकांत बेहरा निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ मयंक राय, निदेशक बीज डॉ डी के राय, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ नीलांजय डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

