
ओईनी न्यूज नेटवर्क
समस्तीपुर । जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू और एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन नें ठाना है कि शिक्षा विभाग और श्रम संसाधन विकास विभाग के साथ मिलकर ईंट भट्ठों पर कार्यरत श्रमिकों के बच्चों का पोषक क्षेत्र के विद्यालयों में अभियान चलाकर नामांकन करायेगा। इस सम्बंध में जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव नें विभिन्न विद्यालय शिक्षा समिति सदस्यों के साथ बैठक कर उन सभी का आह्वान किया है।

उन्होंने बताया कि ईंट भट्ठों पर श्रमिकों के 6 से 14 आयु वर्ग के सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने को लेकर संस्था ने शिक्षा विभाग से आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के निर्देश के अनुसार इन बच्चों के नामांकन के लिए सभी सामाजिक संगठन अपनें अपनें स्तर पर सक्रिय हैं। समस्तीपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी से भी मांग किया गया है कि ईंट भट्ठों व अन्य निर्माण स्थलों पर श्रमिकों के बच्चों का बगल के विद्यालय में नामांकन करानें में अपेक्षित सहयोग करें। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र इसको लेकर सरायरंजन, मोरवा, पटोरी, मोहनपुर, विद्यापतिनगर और समस्तीपुर प्रखंड में स्थित ईंट भट्टा पर रहनेवाले बच्चों का सर्वेक्षण करना शुरू किया है।


सुरेन्द्र कुमार नें कहा कि निर्माण स्थलों पर कार्य करने के लिए कामगार व श्रमिक गांव छोड़ कर कार्य स्थल पर निवास करते हैं, जिसके कारण बच्चों को माता-पिता के साथ रहना पड़ता है। इसके चलते वे पढ़ाई-लिखाई से वंचित हो जाते हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 14 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। ऐसे बच्चों को चिह्नित करने के लिए इन प्रखंडों के प्रखंड स्तरीय अधिकारियों, स्थानीय स्वशासन के साथ एक टीम बनाया जाना है। सर्वेक्षण के लिए बीडीओ, बीइओ, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड खनिज विकास पदाधिकारी व प्रखंड श्रम परिवर्तन पदाधिकारी को भी सहयोग हेतु पत्र दिया गया है।


ईंट भट्ठों व अन्य निर्माण स्थलों पर श्रमिकों के बच्चों की पहचान कर नामांकन के लिए आसपास के निकटतम विद्यालय के प्रधानाध्यापक, विद्यालय के पोषक क्षेत्र में पदस्थापित शिक्षा स्वयंसेवक, विकास मित्र व आवश्यकतानुसार अन्य शिक्षकों की मदद लेने को कहा गया है। ईंट भट्ठा मालिक व अन्य नियोजकों को यह सुनिश्चित करने की अपील की गई है कि उनके यहां कार्य करने वाले श्रमिकों के बच्चों का नामांकन नजदीक के सरकारी अथवा निजी विद्यालय में हो। शिक्षा विभाग नें ऐसे बच्चों का नामांकन अकादमिक सत्र के बीच में कभी भी करनें की व्यवस्था दी है।

यह ज्ञात हुआ है कि कई बच्चों के माता पिता ईंट भट्ठा, बालू घाट, सड़क निर्माण, अन्य सरकारी या गैर सरकारी बड़ी परियोजनाओं में काम करने के लिए अपना गांव छोड़कर कार्यस्थल पर निवास करते हैं। बच्चों को अपनें माता-पिता के साथ रहने की बाध्यता के कारण अपनी पढ़ाई से वंचित होना पड़ता है। इस परिस्थिति में जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र नें यह कदम उठाया है।
