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Home » खरीफ फसलों की तैयारी के साथ क्या–क्या करें किसान

खरीफ फसलों की तैयारी के साथ क्या–क्या करें किसान

नोडल अधिकारी जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र, डॉ. अब्दुस सत्तार ने जारी किए सुझाव
Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar30/05/2026Updated:30/05/2026No Comments4 Mins Read
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खेत की तैयारी।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 समस्तीपुर। अगले 5 दिनों की अवधि में वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसान भाइयों को कृषि कार्यों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। मक्का की कटाई, दौनी एवं दानों को सुखाने का कार्य मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी से करें। मूंग की तैयार फसल की तुढ़ाई भी संभावित वर्षा को ध्यान में रखते हुए समय पर और सतर्कता के साथ पूरी करें।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के नोडल अधिकारी सह प्रख्यात मौसम वैज्ञानिक डॉ. अब्दुस सत्तार ने किसान भाइयों केलिए जारी समसामयिक सुझाव में उक्त बातें कही है।

प्याज की नर्सरी करें तैयार :

इस क्रम में उन्होंने कहा है कि, खरीफ प्याज की खेती के लिए नर्सरी (बीजस्थली) की तैयारी केलिए समय अनुकूल है। स्वस्थ पौच के लिए नैसरी में गोबर की खाद डाले। छोटी-छोटी उथली क्यारियों, जिसकी चौड़ाई एक मीटर एवं लम्बाई सुविधानुसार रखें।

अनुसंशित प्रभेद :

खरीफ प्याज के लिए एन०-53 एग्रीफाउण्ड ढीक रेड, अकी कल्याण, भीमा सुपर किस्में अनुशंसित है। बीज गिराने के पूर्व बीजोपचार कर लें। बीज की दर 8-10 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेयर रखें। बीज प्रमाणित स्त्रोत से खरीदकर ही लगायें।

 धान का बिचड़ा गिराएं :

किसान भाई धान का बिचड़ा बीजस्थली में लगाने का काम शुरु करें। 10 जून तक लम्बी अवधि वाले धान का बिचड़ा गिराने का उपयुक्त समय है। लंबी अवधि वाली धान की प्रजातियों जैसे राजश्री, राजेन्द्र मंसुरी, राजेन्द्र स्वेता, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 वी०पी०टी०-5204 आदि की नर्सरी की बोवाई कर सकते है।

क्या और कैसे करें :

अच्छी पौध के लिए खेत की अच्छी तैयारी करें और सड़ी हुई गोबर की खाद डालें। क्यारियों 1.25 से 1.5 मीटर चौड़ी रखे और बीज प्रमाणित स्रोतों से लें। एक हेक्टेयर रोपाई के लिए 800 से 1000 वर्ग मीटर नर्सरी पर्याप्त होती है। बीज बोने से पहले बीजोपचार अवश्य करें ताकि बीजजनित रोगों से बचाव हो सके।

खरीफ मक्के की खेती केलिए शुरू करें तैयारी :

खरीफ मक्का की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें। खेत की जुताई में 10 से 15 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 30 किलो नेत्रजन, 60 किलो सल्फर एवं 50 किलो पोटाश का व्यवहार करें। उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित मक्का की किस्में जैसे देवकी, शक्तिमान-1, शक्तिमान 2. शक्तिमान 5, राजेन्द्र संकर मक्का-३, गंगा-11 है।

 अदरक की करें बुआई :

अदरक की बुआई करें। अदरक की मरान एवं नदिया किरमें उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है। खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 30 से 40 किलोग्राम, सल्फर 50 किलोग्राम, पोटास 80 से 100 किलोग्राम जिंक सल्फेट, 20 से 25 किलोग्राम एवं बोरेक्स 10 से 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे। अदरक के लिए बीज दर 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें। बीज प्रकन्द का आकार 20-30 ग्राम जिसमें 3 से 4 स्वस्थ कलियों हो। रोपाई की दूरी 30×20 से०मी० रखे। अच्छे उपज के लिए रीडोमिल दवा के 0.2 प्रतिशत घोल से उपचारित बीज की बुआई करें।

 गन्ने को स्मट रोग से बचाएं :

गन्ने की फसल में कालिका (स्मट) रोग के प्रकोप होने की संभावना है। यदि गन्ने के पौधे के पिडका से काले रंग की चाबुकनुमा डंठल निकलता हुआ दिखाई दे. जो उजले रंग की झिल्ली से बैंका हो, तो यह कालिका रोग का लक्षण है। प्रभावित गन्ने को पॉलिथीन से सावधानी पूर्वक बैंककर काटें तथा खेत से बाहर निकाल दें।

 पशु चारा की करें बुआई :

पशुओं के चारा के लिए ज्वार, बाजरा तथा मक्का की बुआई करें। इसके साथ मेथ, लोबिया तथा राईस बीन की बुआई अन्तर्वती खेती में करने से चारे की गुणवता बढ़ जायेगी तथा दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक चारा प्राप्त होगा।

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Centre For Advanced Studies On Climate Change Pusa Dr A Sattar Dr. Rajendra Prasad Central Agriculture University Pusa Rural Agricultural Weather Service
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