
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। अगले 5 दिनों की अवधि में आंधी एवं वज्रपात के साथ वर्षा होने की संभावना है। अतः फसलों में कीटनाशक अथवा उर्वरकों का प्रयोग सावधानी पूर्वक करें।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र ने आगामी मौसम के आलोक में किसान भाईयों के लिए एहतियात बरतने की सलाह देते हुए उक्त बातें कही है।
तना छेदक कीट से बचाव हेतु करें निगरानी :
सुझाव में वैज्ञानिकों ने कहा है कि, रबी मक्का की कटाई एवं भण्डारण के कार्य को प्राथमिकता देकर करें। हलाकि पूर्वानुमानित अवधि में वर्षा की संभावना को देखते हुए इस कार्य में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। वहीं ग्रीष्मकालीन मक्का में तना छेदक कीट से बचाव हेतु नियमित निगरानी करें।
तैयार लीची के बागान में न करें छिड़काव :
वज्रपात एवं मेघ गर्जन के दौरान खेतों में कार्य करने से बचें तथा सुरक्षित स्थान पर शरण लें। तैयार शाही लीची की यथाशीघ्र तुड़ाई कर लें। इस अवस्था में लीची बागानों में किसी भी प्रकार के कीटनाशी का छिडकाव नहीं करें।
खरीफ मक्के के बुआई की करें तैयारी :
खरीफ मक्का की बुआई हेतु खेत की तैयारी करें तथा जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 100-150 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ 30 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस एवं 50 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें।
स्मट रोग से गन्ने की रक्षा :
गन्ने की फसल में कालिका (स्मट) रोग के प्रकोप होने की संभावना है। यदि गन्ने के पौधे के पिहका से काले रंग की चाबुकनुमा डंठल निकलता हुआ दिखाई दे, जो उजले रंग की झिल्ली से ढँका हो, तो यह कालिका रोग का लक्षण है। प्रभावित गन्ने को पॉलिथीन से सावधानीपूर्वक बैंककर काटें तथा खेत से बाहर निकाल दें। रोग नियंत्रण हेतु प्रोपिकोनाजोल (टिल्ट) 1 मिली/लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 15-20 दिनों के अंतराल पर तीन बार छिड़काव करें।
नर्सरी का रख रखाव :
किसानों को लंबी अवधि वाली धान की किस्मों की बुआई करने हेतु नर्सरी तैयारी करने की सलाह दी जाती है। बुआई का उपयुक्त समय 25 मई से 10 जून के बीच है। स्वस्थ पौध तैयार करने हेतु नर्सरी में अनुशंसित मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करें तथा उपयुक्त नमी बनाए रखें।
ऊंचा एवं सनई की बुआई :
किसानों को हरी खाद हेतु उँचा एवं सनई फसलों की बुआई करने की सलाह दी जाती है।