
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। “बच्चों की अभिरुचि और प्रतिभा के अनुरूप उनका मार्गदर्शन और शैक्षणिक पाठ्यचर्या तैयार करना सर्वांगीण शिक्षा का लक्ष्य है। ऐसे में इस तरह के आयोजनों से एक तरफ बच्चों की अभिरुचि और प्रतिभा को चिन्हित करने में मदद मिलती है वहीं दूसरी तरफ कक्षा के उबाऊ माहौल से अलग उत्सव जैसा माहौल पा कर बच्चे मनोवैज्ञानिक रूप से रिचार्ज हो जाते हैं।”
शनिवार को शहर के राज इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित फूड फेस्टिवल सह कला संस्कृति जागरूकता कार्यक्रम 2026 के उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत करते हुए निदेशक दीपक कुमार मंडल ने उक्त बातें कही। इस क्रम में उन्होंने कहा कि, “अनुभव बताते हैं कि, इस तरह के आयोजनो के बाद बच्चे कुछ दिनों तक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ तन्मयता से पढ़ाई करते हैं।”
फूड फेस्टिवल का आयोजन :
बताते चलें कि, शहर के मथुरापुर स्थित राज इंटरनेशनल स्कूल परिसर में शनिवार की शुरुआत उत्सवी माहौल में हुई। एक तरफ स्कूल का कोना–कोना बच्चों के हर्ष किलोल और कहकहाें से गुंजायमान था तो दूसरी तरफ विविध व्यंजनों की खुश्बू लोगों को बरबस ही अपनी ओर खींच रहे थे। अवसर था राज इंटरनेशनल स्कूल में हर वर्ष की तरह आयोजित फूड फेस्टिवल का। जी हां! शनिवार को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्कूल परिसर में शानदार व जायकेदार फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया।
स्वागत व उद्घाटन :
इस अवसर पर सर्वप्रथम निदेशक दीपक मंडल ने आगत अतिथियों व अभिभावकों का स्वागत अभिनन्दन किया। तत्पश्चात मुख्य अतिथि सदस्य सह सोशल मजिस्ट्रेट जुबेनाइल जस्टिस बोर्ड निर्भय कुमार सिंह, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी जूही कुमारी, स्कूल की निदेशक निशा राज, प्राचार्य डॉ. उज्जवल रतन सिन्हा और विशाल कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं फीता काट कर फूड फेस्टिवल का विधिवत उद्घाटन किया।

विभिन्न राज्यों के पकवानों का लिया जायका :
इस फेस्टिवल में बच्चों ने भारत के विभिन्न राज्यों के मुख्य पकवान तैयार कर परोसे। जिसका अतिथियों व अभिभावकों ने चटखारे ले ले कर स्वाद लिया और जम कर प्रशंसा की।

सांस्कृतिक जागरूकता कार्यक्रम 2026 :
इसी दौरान कला संस्कृति एवं युवा कार्यक्रम विभाग के तत्वावधान में सांस्कृतिक जागरूकता कार्यक्रम 2026 का आयोजन किया गया।
हमारी कला संस्कृति पॉवर बैंक की तरह :
इस अवसर पर अपने संबोधन में कला संस्कृति पदाधिकारी श्रीमती जूही ने भारतीय कला एवं संस्कृति के समृद्ध विरासत खास कर मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा व पहचान को समझने और सहेजने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा हमारी कला संस्कृति पॉवर बैंक की तरह है जो कुछ ही पल में तमाम तरह के थकान, अवसाद आदि से निजात दिला कर हमें रिचार्ज कर देते हैं।
नृत्य वास्तव में स्वर–ताल–लय बद्ध व्यायाम :
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कत्थक गुरु लक्ष्मण कुमार ने बच्चों क़ो शास्त्रीय नृत्य की जानकारी दी तथा कथक नृत्य की सामान्य बारीकियां सीखा कर बच्चों क़ो जागरूक किया। इस क्रम में उन्होंने कहा कि नृत्य वास्तव में स्वर–ताल–लय बद्ध व्यायाम भी है। इस अवसर पर मौजूद बच्चों के अभिभावकों ने कार्यक्रम की सराहना की।