
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 विद्यापतिनगर। उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ ही प्रकृति पूजन की सांस्कृतिक परंपरा के तहत चार दिवसीय अद्भुत व अनोखा महानुष्ठान, लोक आस्था का महापर्व ‘चैती छठ’ बुधवार को पौ फटते ही संपन्न हो गया। इस अवसर पर अहले सुबह व्रतियों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार केलिए चिर आरोग्य, अक्षय स्वास्थ्य, व अमिट सुख-शांति के लिए भगवान भास्कर एवं छठी मईया से प्रार्थना की।
अनोखा लोक पर्व है छठ :
पंडित या पुरोहित, भारी भरकम मंत्रों व हवन आदि के बिना संपन्न होने वाला यह भारतीय संस्कृति का एक ऐसा अनोखा लोक पर्व है जिसमें, चिर आरोग्य, अक्षय स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से डूबते और उगते दोनों अवस्था में सूर्य की आराधना की जाती है। जिसमें सिर्फ और केवल सिर्फ आस्था, श्रद्धा, शुद्धता और पवित्रता के प्रति कठोरता की पराकाष्ठा और करीब 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत की प्रधानता है।
सूर्य की पहली झलक के साथ अर्घ्य दान शुरू :
बीते रविवार को नहाय-खाय के साथ चैती छठ का यह चार दिवसीय महानुष्ठान प्रारंभ हुआ था। इसी क्रम में सोमवार को खरना के अवसर पर कुलदेवी को नैवेद्य निमंत्रण देने के बाद मंगलवार को व्रतियों व श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया था। बुधवार को रात्रि के अंतिम प्रहर के आखिरी हिस्से में व्रती जलाशयों में खड़े होकर अक्षय ऊर्जा के स्वामी भगवान भास्कर का ध्यान करते हुए उनके आगमन की प्रतीक्षा की। सुबह जैसे ही सूर्य की पहली झलक मिली व्रती अर्घ्य देने में जुट गयी।
डूबते सूर्य के पूजन–नमन की व्यवस्था :
बताते चलें कि, जड़–चेतन सभी को प्रेम, और सम्मान देने वाली भारतीय संस्कृति में सिर्फ ईश्वर ही नहीं धरती–आकाश, सूर्य–चंद्रमा, खेत–खलिहान, पशु–पक्षी, कीड़े–मकोड़े, जड़–चेतन, पेड़–पौधे सभी के पूजन की परम्परा है। उगते हुए सूर्य को विभिन्न रूपों में पूरी दुनिया प्रणाम करती है, मगर सिर्फ भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में डूबते हुए सूर्य को पूजन–नमन की व्यवस्था है।
विधान पार्षद ने दी छठ पूजा की बधाई :
बहरहाल, जिले भर में छठ पूजा को लेकर उत्साह और उमंग का माहौल रहा। जिले भर में जगह–जगह छठ घाटों पर तो कई जगह श्रद्धालू घर के आसपास अस्थाई घाट निर्माण कर अर्घ्य दान करते दिखे। इस दौरान श्रद्धालुओं वो व्रतियों ने बांस से बने सूप में नारियल, मौसमी फल तथा अन्य पूजन सामग्री के साथ पानी में खड़े होकर प्राकृतिक ऊर्जा के अक्षय स्रोत सूर्य की आराधना की।
छठ मैया के गीतों से वातावरण भक्तिमय :
प्रखंड के विद्यापतिधाम शिवगंगा पोखर, धमनी पोखर, के अलावा बाया नदी के विभिन्न घाटों सहित अपने-अपने दरवाजे पर ही गड्डा खोदकर पूजा-अर्चना के लिए लोग घाटों पर उमड़े हुए थे। इस दौरान महिलाओं ने छठ मैया के गीतों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया था। वहीं घाटों पर अर्घ्य के पास जलाये गये दिप व अगरबत्ती की सुगंध से वातावरण सुगंधित हो गया था।
पारन के साथ 36 घंटे का कठोर व्रत संपन्न :
अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाओं ने एक दूसरे की मांग में सिंदूर लगाकर अमर सुहाग व निरोगी काया की कामना की। घाट से घर लौटने के बाद व्रतियों ने कुलदेवता को प्रसाद चढ़ाने के बाद व्रतियों ने पारण कर 36 घंटे के निर्जला व्रत को समाप्त किया।