
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। बिहार के विभिन्न जिलों से आए 40 प्रगतिशील किसानों के लिए आयोजित “वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन एवं शहद मूल्य संवर्धन” विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 18 से 20 मार्च 2026 तक चला यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा प्रायोजित “बिहार में लिची शहद का समृद्ध विकास – भौगोलिक संकेत (GI) के माध्यम से” प्रोजेक्ट के अंतर्गत आयोजित किया गया था।
प्रशिक्षण में विपणन रणनीति तथा उद्यम विकास शामिल :
समापन सत्र में मुख्य रूप से डॉ. नागेन्द्र कुमार, डॉ. मोहित कुमार, डॉ. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. ध्रुव कुमार तथा डॉ. रामानंद कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा तैयार 14 समृद्ध व्याख्यान दिए गए, जिनमें वैज्ञानिक कॉलोनी प्रबंधन, रोग नियंत्रण, रानी मधुमक्खी पालन, शहद निकासी, मूल्यवर्धित उत्पाद (स्वादिष्ट शहद, मोमबत्ती, प्रोपोलिस आदि), विपणन रणनीति तथा उद्यम विकास शामिल थे।
पारंपरिक व्यवसाय से व्यावसायिक उद्यम :
इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने कार्यक्रम से पूर्ण संतुष्टि व्यक्त की और कहा कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें न केवल तकनीकी कौशल बल्कि मधुमक्खी पालन को लाभदायक उद्यम बनाने का व्यावहारिक ज्ञान भी प्रदान किया है। कई किसानों ने तो यह भी कहा कि, यह प्रशिक्षण उनके लिए मधुमक्खी पालन को पारंपरिक व्यवसाय से व्यावसायिक उद्यम में बदलने का सुनहरा अवसर साबित हुआ।
कुशल व तकनीकी रूप से सक्षम मधुमक्खी पालकों का विकास :
समापन सत्र को संबोधित करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत सरकार के मधुक्रांति मिशन के उद्देश्यों से पूर्णतः जुड़ा है। यह बिहार राज्य में कुशल एवं तकनीकी रूप से सक्षम मधुमक्खी पालकों का विकास करेगा तथा लिची शहद को भौगोलिक संकेत (GI) उत्पाद के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।