
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 समस्तीपुर। डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में डिजिटल एग्रीकल्चर के माध्यम से कृषि को अधिक नवाचार आधारित बनाने और किसानों की आय बढ़ाने केलिए विभिन्न आधुनिक मॉडलों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इन मॉडलों के जरिए किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे आधुनिक तरीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकें।
किसान मेला 2026 के दूसरे दिन मेला में लगे कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के स्टॉल का निरीक्षण करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही।
सैटेलाइट मौसम पूर्वानुमान व कीट प्रबंधन में सहायक :
उन्होंने बताया कि, विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए इन मॉडलों में यह प्रदर्शित किया गया है कि कैसे सैटेलाइट के कारण, मोबाइल फोन के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को संचालित किया जा सकता है तथा फसलों में पोषक तत्वों का संतुलित प्रबंधन किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने बताया कि, सैटेलाइट के माध्यम से किसानों को मौसम, एवं उसके अनुरूप फसलों पर किसी प्रकार के कीट के प्रकोप की संभावना एवं उसके प्रभावी प्रबंधन की ससमय जानकारी मिल सकेगी।
डिजीटल एग्रीकल्चर में व्यापक संभावना :
कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि आने वाले समय में डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। विश्वविद्यालय डिजिटल एग्रीकल्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक मे कई कार्य कर रहा है । किसान मेला में नई तकनीकों को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
खेती को अधिक वैज्ञानिक और सटीक बना देगा एआई तकनीक :
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि डिजिटल कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से खेती को अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाया जा सकता है। इससे किसानों को समय पर आवश्यक जानकारी प्राप्त होगी और उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ उपज में भी वृद्धि संभव हो सकेगी।
ड्रोन तकनीक से सिंचाई व कीटनाशक आदि छिड़काव होगा आसान :
इसके साथ ही किसानों को ड्रोन तकनीक के उपयोग के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। ड्रोन के माध्यम से फसलों की निगरानी, उर्वरक एवं कीटनाशक के छिड़काव तथा खेतों की स्थिति का आकलन तेजी और सटीकता के साथ किया जा सकता है।
ड्रोन दीदी” कार्यक्रम के तहत कई ड्रोन पायलट हो चुकी प्रशिक्षित :
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इससे पहले यहां “ड्रोन दीदी” कार्यक्रम के तहत कई महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा बिहार पुलिस सहित अन्य विभागों के कर्मियों को भी ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में इस तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा सके।