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    Home » अदा अदब और आदाब की धरती, ऐतिहासिक दाल मंडी और वहां स्थित पुश्तैनी दुकानों पर संकट के बादल

    अदा अदब और आदाब की धरती, ऐतिहासिक दाल मंडी और वहां स्थित पुश्तैनी दुकानों पर संकट के बादल

    Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar13/02/2026No Comments3 Mins Read
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    दाल मंडी।

    ओईनी न्यूज नेटवर्क।

    गोपी चंद्र मिश्रा।

    Oini 24 वाराणसी। कला और साहित्य की गंगोत्री के रूप में प्रसिद्ध अदा, अदब और आदाब की प्रतीक बनारस की दाल मंडी गली अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने की ओर अग्रसर है। कहते हैं, एक दौर था जब देश की सांस्कृतिक राजधानी बनारस का ‘रस’ हुआ करती थी कभी ये दालमंडी गली।

    दालमंडी का समृद्ध और वैभवशाली परंपरा :

    प्रत्यक्षतः तवायफों की इस गली में कई कोठे थे और उन कोठों पर तवायफें रहती थी। मगर यहां जिस्म–फरोशी नहीं होती थी। ये कला साधिकाएं थी, जिनकी नजाकत और नफासत का जादू पूरे देश में फैला था। जद्दन बाई, रसूलन बाई, राजेश्वरी बाई जैसे कई नाम हैं जिन्हें देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से उस वक्त के रईस यहां आते थे। करीब 300 साल से अधिक पूरानी कला संस्कृति की समृद्ध विरासत और वैभवशाली परंपरा अब सिर्फ किस्से कहानियों में सिमट जाएगी।

    दालमंडी के सैकड़ों परिवारों के समक्ष आजीविका संकट :

    दालमण्डी मार्ग के प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में आ रही दुकानों को लेकर प्रभावित व्यापारियों ने गुरुवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने मांग की है कि दुकानें खाली कराने या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले उन्हें वैकल्पिक स्थान पर पुनर्वास अथवा उचित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के कार्रवाई होने पर सैकड़ों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी।

     व्यापारियों में भविष्य और भरण पोषण की चिंता :

    व्यापारियों ने ज्ञापन में बताया कि दालमण्डी क्षेत्र में स्थित उनकी दुकानें उनके पूर्वजों द्वारा स्थापित की गई थीं और पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से ये दुकान उनकी आजीविका का साधन है। इन्हीं दुकानों से होने वाली आय से परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा, शादी-विवाह, इलाज और अन्य आवश्यक खर्च पूरे होते हैं। ऐसे में अचानक ध्वस्तीकरण की नोटिस मिलने से व्यापारियों में गहरी चिंता व्याप्त है।

    विकास का विरोध नहीं, हितों की न हो अनदेखी :

    व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से दुकानें खाली करने और ध्वस्तीकरण की नोटिस जारी की गई है। इससे क्षेत्र के व्यापारियों और उनके परिवारों के सामने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उनका कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

    पुनर्वास और मुआवजे की मांग :

    ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि कार्रवाई से पूर्व उन्हें किसी उपयुक्त स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए और समुचित मुआवजा एवं आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। उनका कहना है कि बिना पुनर्वास के उनकी आजीविका का एकमात्र साधन समाप्त हो जाएगा, जिससे परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

    मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील :

    व्यापारियों ने जिलाधिकारी से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है, ताकि प्रभावित परिवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया तो वे आगे की रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे।

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    Daal Mandi Varanasi
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