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    Home » जलवायु अनुकूल कृषि से विकसित भारत की ओर थीम पर आधारित किसान मेला 2025 का शुभारंभ कल

    जलवायु अनुकूल कृषि से विकसित भारत की ओर थीम पर आधारित किसान मेला 2025 का शुभारंभ कल

    Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar14/02/2025No Comments5 Mins Read
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    डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा

    पूसा। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में अगामी 15 फरवरी से तीन दिवसीय किसान मेला का आयोजन किया जा रहा है। इसको लेकर तमाम तैयारियां अंतिम चरण में है। इस वर्ष मेले का थीम अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन के इस दौर में “जलवायु अनुकूल कृषि से विकसित भारत की ओर” निर्धारित है।

    जलवायु परिर्वतन आज एक सच्चाई है। प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, गहन कृषि और अत्यधिक मानवीय गतिविधियों ही वे प्रमुख प्रभावकारी कारक हैं जिसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन का देश प्रत्यक्ष अनुभव किया जा रहा है।

    हम अपने परम्परागत प्रकृति आधारित जीवन पद्धति से दूर होकर आधुनिकता की ओर बढ़ने की होड़ में लगे हैं जिसके दुष्परिणामों से ही हमारा सम्पूर्ण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो गया है। जलवायु परिर्वतन ने निश्चित रूप से हमारी कृषि पर गंभीर प्रभाव डाला है, जिससे खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।

    क्योंकि इन बदली हुई परिस्थितिओं के कारण जलवायु विशेष क्षेत्र के लिए कृषि उत्पादन हेतु उपयुक्त फसलों के चपन और जलवायु अनुकूल कृषि उत्पादन तकनीकों के अनुप्रयोग से ही संभव हो पाता है। जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों के फलस्वरूप तापमान में अनियमित उतार चढ़ाव देखा जा रहा है। जिससे अवांछनीय गर्म व ठंढी हवाओं के कारण फसलों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है जिससे फसल उत्पादन सीमित हो रहा है।

    भारत ने खाद्यात्र उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की है। जिसे सुनिश्चित करने के हेतू, उपलब्धता, पहुंच, उपयोग और स्थिरता ही चार प्रमुख स्तंभ रहे हैं। हालांकि, हमारी उत्पादन प्रणाली अभी भी अन्न प्रधान होते हुए, संसाधनों और क्षेत्र विशेष पर ही आधारित है।

    हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों में, कुपोषण और गरीबी के अलावा, जलवायु परिवर्तन गंभीर चिंता का प्रमुख विषय है। अतः विकसित भारत के अभियान में टिकाऊ और लाभकारी कृषि उत्पादन हेतु, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकियों में समाहित कृषि उत्पादन विधाओं का अनुप्रयोग एक प्रभावी एवं समाधानकारी उपाय साबित हो सकता है।

    “विकसित भारत @ 2047′ का आह्वान :-

    2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के हमारे सामूहिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। 2047 तक विकसित स्थिति प्राप्त करने के लिए प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आप (GNI) में छह गुना वृद्धि की आवश्यकता है, जो वास्तव एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है।

    हमारे देश की लगभग आधी आबादी जीविकोपार्जन के लिए खेती पर आधारित है। अधिकांश कृषक लघु और सीमान्त कोटि के है और कृषि सकल घरेलू उत्पाद में इनका योगदान मामूली ही है। देश के सतत विकास के लिए किसानों की आय में न्यायसंगत सुधार आवश्यक है।

    यह कदम “विकसित भारत अभियान में कारगर होगा क्योंकि विकसित भारत’ का मुख्य उद्देश्य किसानो को आधुनिक तकनीकों और आकर्षक बाजार तक पहुँच प्रदान करना है। जिससे उत्कृष्ट उपभोक्ता प्रणाली का विकास के साथ उच्च मूल्य वाली कृषि का विविधीकरण संभव हो। जिसमें किसानों केलिए स्थायी आजीविका की गारण्टी सुनिहित हो ।

    जलवायु अनुकूल कृषिकरण के तहत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन रणनीतियों के साथ-साथ बेहतर सिंचाई तकनीकों (डिप सिंचाई और जल संचयन), मौसम प्रतिरोधी फसल प्रभेदों (सूखा प्रतिरोधी, बाढ़ प्रतिरोधी, गर्मी सहिष्णु फसलों में अनुसंधान और विकास) की खेती से जलवायु परिवर्तन का अनुकूलन प्राप्त किया जा सकता है। फसल चक्र, कृषि वानिकी और जैविक खेती जैसी टिकाऊ कृषि प्रणालियों, यथा उपयुक्त कृषि तकनीक, डिजिटल कृषि, मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जैसे नवीन कृषि उपयोगी तकनीक, किसानों की लाभदायक उत्पादन प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं।

    जलवायु स्मार्ट कृषि संबंधी तकनीक यथा, शून्य जुताई, वैकल्पिक रूप से नमी संचय करना और सुखाना, ऊँचे मेड़ पर रोपण, लेजर लेवलर द्वारा समतलीकरण, लीफ कटर चार्ट, और फसल प्रणाली अनुकूलन के साथ-साथ कम्प्यूटरीकृत पोषक तत्व अध्ययन जैसे आधुनिक उपकरण यथा, ग्रीन सीकर, न्यूट्रिएंट एक्सपर्ट, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।

    मिट्टी की उरवर्रता, जैत्र विविधता, अंतरफसली कृषि पद्धति और कृषि वानिकी को अपनाने से जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है, पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बढ़ता है और आप के विविध स्रोतों का सृजन होता है।

    कृषि में जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को निष्वभावी करने और आजादी के 100 वर्षों में विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों के माध्यम से उचित विकल्पों के व्यापक प्रचार प्रसार के उद्देश्य से कृषि क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के बीच जागरूकता सुजन हेतु विश्वविद्यालय ने इस विषय पर किसान मेला आयोजित करने की योजना बनाई है।

    किसान मेले का उद्देश्य :-

    भारत में कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की स्थापना, किसानों के बीच कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कृषि प्रौद्योगिकियों के विस्तार को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से की गयी थी। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, वैज्ञानिकों, उत्पादकों सेवा प्रदाताओं और किसानों को शामिल करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में एक वार्षिक किसान मेला आयोजित करता है।

    इस कड़ी में वर्ष 2025 में दिनांक 15से 17 फरवरी के दौरान इसका आयोजन “जलवायु अनुकूल कृषि से विकसित भारत की ओर” विषय पर किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय किसान मेले के मुख्य आकर्षणों में,

    कृषि संबंधी तकनीक,  अनुसंधान व कौशल का प्रसार।

    कृषि संबंधी ज्ञान का प्रसार

    उद्यानिक पौधे एवं पशु-पक्षी प्रदर्शनी

    मृदा जांच परीक्षण सुविधाएँ व पादप स्वास्थ्य क्लिनिक सेव

    डिजिटल कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन। जलवायु अनुकृत कृषि तकनीक का प्रसार

    कृषि क्षेत्रों में उत्पादको सेवा प्रदाता, वित्तीय संस्थाओं और बैंकों के द्वारा जागरुकता शिविर।

    विविध साद्य मस्जिद, श्रीअन फामती फूल कला संग्रहालय आदि की प्रदर्शनी।

    विक्रय के लिए फल फूल व अन्य नर्सरी पौधे।

    प्रश्नोत्तरी व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन।

    समसामयिक खेती संबद्ध मुद्दों पर चर्चा।

    ड्रोन के प्रदर्शन के साथ-साथ सुक्ष शिवाई प्रणाली में डीन तकनीक के उपयोग पर तर्क।

    कृषि उपकरणों के उत्पाद विभित्र कृषिओं और अन्य सरकारी सेकओं सहित विभित्र राज्यों

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