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Home » कृषि वैज्ञानिक ने बताया खेती में कैसे होगा कम लागत में अधिक मुनाफा, क्या है उपाय

कृषि वैज्ञानिक ने बताया खेती में कैसे होगा कम लागत में अधिक मुनाफा, क्या है उपाय

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar30/12/2025No Comments3 Mins Read
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बैठक में शामिल किसान।

ओईनी न्यूज नेटवर्क।

Oini 24 शिवाजीनगर । जलवायु परिवर्तन आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है और किसान यदि वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो अधिक उत्पादन के साथ-साथ लागत में भी कमी लाई जा सकती है और खेती में मुनाफा बढाया जा सकता है। इस क्रम में स्प्रे के लिए ड्रोन तकनीक, जीरो टिलेज विधि से बुआई और ड्रिप इरीगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से समय और श्रम की बचत होती है और उत्पादन भी बढ़ता है।

जिले के शिवाजी नगर प्रखण्ड में सोमवार को आत्मा योजना के अंतर्गत कैफेटेरिया ऑफ एक्टिविटी के तहत “जलवायु अनुकूल कृषि” एवं समसामयिक विषय पर आयोजित किसान गोष्ठी के दौरान उपस्थित वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने अपने संबोधन के दौरान उक्त बातें कही।

किसान गोष्ठी में क्या हुआ :

इस बाबत जानकारी देते हुए प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक, आत्मा समस्तीपुर के आदेशानुसार प्रखंड के दहियार रन्ना पंचायत स्थित धोबियाही ब्रह्मस्थान परिसर में आयोजित इस क्षेत्र दिवस सह किसान गोष्ठी में “किसानों को बदलते जलवायु के कारण खेती पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों से अवगत कराने तथा उससे निपटने के लिए खेती में आवश्यक तकनीकी बदलावों की जानकारी देने, बदलते जलवायु परिदृश्य में खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस किसान गोष्ठी में अनिश्चित जलवायू की वैश्विक समस्या के बीच कम लागत में अधिक फसल और मुनाफा हासिल करने के उपाय पर विस्तार से जानकारी साझा की गई।”

कृषि वैज्ञानिक नेक्या कहा :

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, लादा से आए कृषि वैज्ञानिक डाॅ जोगेंद्र सोरेन ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि “बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, तापमान में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक एवं जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाना होगा।”

उन्होंने तनावरोधी किस्मों के चयन पर जोर देते हुए कहा कि “ऐसी किस्में कम पानी और प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन देते हैं। इस क्रम में उन्होंने किसानो को फसल चक्र अपनाने, बहुफसली एवं अंतरवर्तीय फसल पद्धति को अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जोखिम भी कम होता है।” साथ ही उन्होंने समय-समय पर खेत की मिट्टी जांच कराने को आवश्यक बताया ताकि संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग किया जा सके।

इसके पुर्व :

अतिथियों के स्वागत सम्मान की औपचारिकता के बाद सबसे पहले पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि राजेश कुमार सिंह एवं पंचायत समिति सदस्य मदनेश्वर झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर गोष्ठी का विधिवत उद्घाटन किया।

तत्पश्चात मंच संचालन करते हुए आत्मा के सहायक तकनीकी प्रबंधक अमरदीप शर्मा ने आत्मा योजना के उद्देश्यों और किसानों के लिए उपलब्ध विभिन्न प्रशिक्षण एवं सहायता कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि “आत्मा योजना का लक्ष्य किसानों को नई तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है।”

अंत में :

गोष्ठी के दौरान कृषि समन्वयक कैलाश सहनी ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि योजनाओं और उन पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी किसानों को दी। जिसमें उन्होंने ई-केवाईसी की अनिवार्यता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और उसके आर्थिक लाभ पर विस्तृत चर्चा की।

इस दौरान किसानों ने भी अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए। वैज्ञानिकों और कृषि पदाधिकारियों ने किसानों के प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, आत्मा कर्मी, कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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Atma Samastipur Cafeteria Of Activities Dr Jogendr Soren Dr Rajendr Prasad Central Agricultural University Pusa KVK Lada
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