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    Home » कृषि में भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान करने की जरूरत : डाॅ पीएस पाण्डेय

    कृषि में भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान करने की जरूरत : डाॅ पीएस पाण्डेय

    Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar26/12/2025No Comments4 Mins Read
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    डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अनुसंधान परिषद की बैठक आरंभ

    उद्घाटन करते कुलपति व अतिथि।

    ओईनी न्यूज नेटवर्क।

    Oini 24 पूसा । बिहार में छोटे जोत के किसान अधिक है इसलिए कम लागत वाले स्वचालितयंत्रों को विकसित करने की जरूरत है। विश्वविद्यालय ने समेकित कृषि का माॅडल विकसित किया है लेकिन अब छोटे व मध्यम जोत वाले किसानों को ध्यान में रखकर कई नये माॅडल विकसित करने की जरूरत है।

    डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में आयोजित तीन दिवसीय अनुसंधान परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति डाॅ पीएस पाण्डेय ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को अब रोबोटिक्स, प्रेसीजन फार्मिंग और इंटरनेट आॅफ थिंग्स पर भी काम करना होगा। उन्होंने कहा कि

    बताते चलें कि डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के विद्यापति सभागार में तीन दिवसीय अनुसंधान परिषद की बैठक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार सबसे पहले अतिथियों का शाॅल आदि से स्वागत सम्मान और कुलगीत प्रसारण के बाद आगत अतिथियों संग कुलपति ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर बैठक का विधिवत उद्घाटन किया।

    तमाम प्रारंभिक औपचारिकताओं के बाद कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने र्बैठक को संबाधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में अनुसंधान के क्षेत्र में तीव्र प्रगति हुई है लेकिन हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर में बेहतर बनने केलिए अभी काफी कुछ करने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि सामने चुनौती बडी है, इसलिए आने वाले दिनों में देश को विकसित बनाने में वैज्ञानिकों की अहम भूमिका होगी। कृषि में भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों को अनुसंधान करने की आवश्यकता है। जलवायु अनुकूल कृषि के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार के साथ मिलकर अच्छा कार्य किया है और चैथे कृषि रोड मैप में राज्य के कृषि विकास को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।

    अपने संबोधन में पूर्व कुलपति डॉ एआर पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय डॉ पांडेय के नेतृत्व में पूरे देश को नई राह दिखा रहा है। नेचुरल फार्मिंग के क्षेत्र में कोर्स व अनुसंधान शुरू करने वाला यह पहला विश्वविद्यालय है। अब सभी विश्वविद्यालयों में नेचुरल फार्मिंग पर कोर्स शुरू करने का निर्णय सरकार ने लिया है। विश्वविद्यालय का दीक्षारंभ भी सभी विश्वविद्यालयों में लागू किया गया है।

    उन्होंने ने कहा कि विश्वविद्यालय का जलवायु अनुकूल अनुसंधान परियोजना के कारण राज्य के तेरह जिलों में पचहत्तर हजार से अधिक किसानों की आमदनी में बीस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इस क्रम में किसानों ने तीस प्रतिशत से अधिक पानी की और पैंतीस प्रतिशत कम खाद का प्रयोग किया है। डाॅ पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय की यह परियोजना आने वाले समय में देश और दुनिया को नई राह दिखायेगा।

    इसी क्रम में पूर्व कुलपति डॉ जेपी शर्मा ने कहा कि भारत मे जोत का आकार घटकर एक हेक्टेयर से भी कम हो गया है। पानी की उपलब्धता पहले की तुलना में काफी तेजी से कम हो रही है और किसानों के साथ-साथ युवाओं का भी खेती से मोहभंग हो रहा है। इसलिए मौजूदा हालात में वैज्ञानिकों को इन तीनों पर ही काम करने की आवश्यकता है।

    उन्होंने कहा कि खेती को अब एक व्यवसाय का रूप देने की आवश्यकता है ताकि युवा इस ओर आकर्षित हो और उन्हें अहसास हो कि कृषि से न सिर्फ मुनाफा कमाया जा सकता है बल्कि यह देश की सेवा है और इस कार्य में सम्मान भी है।

    वहीं पूर्व कुलपति डॉ एके व्यास ने कहा कि प्रकृति की प्रत्येक ईकाई परस्पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसके तहत मनुष्य और प्रकृति का स्वास्थ्य कृषि से जुड़ा हुआ है। इसलिए मिट्टी का स्वास्थ्य खराब होगा तो पौधों और फसलों का स्वास्थ्य खराब होगा और फिर मनुष्य का स्वास्थ्य खराब होगा। अतः कृषि वैज्ञानिकों को भी अपने अनुसंधान में यह ध्यान रखना चाहिए और ऐसी परियोजनाओं को विकसित करना चाहिए जो प्रकृति और मिट्टी को, फसलों को और मनुष्य को फायदा पहुंचा सके।

    एनआरसी लीची के निदेशक डॉ विकास दास ने कहा कि भारत में अन्न की कमी नहीं है अब हमें पोषण सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए ताकि लोगों को संपूर्ण पोषण मिल सके।

    इसके अलावा निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह ने विश्वविद्यालय में चल रहे अनुसंधान परियोजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि इस बैठक में 133 नये अनुसंधान परियोजनाओं पर मंथन किया जायेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं सहित अन्य परियोजनाओं की समीक्षा की जायेगी।

    कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रियंका त्रिपाठी ने जबकि धन्यवाद ज्ञापन सह निदेशक अनुसंधान डॉ एसके ठाकुर ने किया। मौके पर निदेशक शिक्षा डॉ उमाकांत बेहरा, डीन पीजीसीए डॉ मयंक राय, डीन बेसिक साइंस डॉ अमरेश चंद्रा, डीन फिशरीज डॉ पीपी श्रीवास्तव, निदेशक कृषि व्यवसाय एवं ग्रामीण प्रबंधन डॉ रामदत्त, डॉ घनश्याम झा, डॉ महेश कुमार, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ कुमार राज्यवर्धन सहित शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे ।

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