
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini 24 डेस्क समस्तीपुर। राष्ट्रकवि दिनकर भारतीय संस्कृति के सच्चे विचारक हैं। दिनकर की रचनाएं सिर्फ राष्ट्र प्रेम से ही संदर्भित नहीं है, वरण उनकी कविताएं और चिंतन गहरे सांस्कृतिक बोध की परिचायक हैं। इसलिए उन्हें उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक योगदान के लिए भारत रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए।
राष्ट्रकवि दिनकर पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में अ मुख्य अतिथि सेंट्रल यूनिवर्सिटी असम के डॉ सत्यदेव प्रसाद ने उक्त बातें कही।
बताते चलें कि डाॅ भोला झा रिसर्च फाउंडेशन तथा भारती नवजीवन संस्थान शेखपुरा समस्तीपुर के तत्वावधान में संस्थान परिसर में डा भोला झा के अध्यक्षता में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मैथिल परंपरा के अनुसार, अतिथियों के स्वागत सम्मान एवं दीप प्रज्जवलन कर उद्घाटन की औपचारिकता के बाद मुख्य अतिथि सेंट्रल यूनिवर्सिटी असम के डॉ सत्यदेव प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि
संगोष्ठी के उद्घाटनकर्ता ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के सिनेटर डॉ विजय कुमार झा ने कहा कि दिनकर के साहित्य में भारतीय संस्कृति का इतिहास वर्णित है, जिसमें उनहेांने उत्तर वैदिककालीन आर्य अनार्य संस्कृति का विस्तार से वर्णन किया है।
समारोह में विशिष्ट अतिथि महर्षि चिदात्मन वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान सिमारियाधाम के उप सचिवध्प्रवक्ता प्रो पीके झा प्रेम ने कहा कि दिनकर अपने साहित्यिक उपलब्धि से शिखर को प्राप्त किया है, उन्हें उनके विशिष्ट योगदान के लिए भारत रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ भोला झा ने कहा कि वस्तुत: दिनकर इतिहास के ही विद्वान हैं, जिन्होंने साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
इसके पुर्व संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के डॉ भोला ईसर ने स्वस्ति वाचन करते हुए संगाष्ठी का शुभारंभ किया। तत्पश्चात सभी सम्मानित अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर संगोष्ठी का विधिवत उद्घाटन किया। सभी सम्मानित अतिथियों को मिथिला परम्परा के अनुसार डॉ भोला झा तथा प्रियदर्शी अशोक ने पाग चादर और पुष्पहार भेंटकर सम्मानित किया।
सभी सम्मानित अतिथियों को प्रो प्रेम ने भी अपने संस्थान से प्रकाशित सर्वमंगला पंचांग तथा अम्बरमणि त्रैमासिक पत्रिका भेंटकर सम्मानित किया। धन्यवाद ज्ञापन विकास झा ने किया।