
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
सुभाष चन्द्र कुमार
समस्तीपुर । पश्चिमी शुष्क हवाओं से प्रभावित गेहूं की फसल को बचाने की जरूरत है। ताकि गेहूं उत्पादक किसानों के उत्पादन पर असर नहीं पड़े।
डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय के अधीनस्थ गेहूं वैज्ञानिक सह बीज निदेशालय के निदेशक डाॅ डीके राय उक्त बातें संवाददाता से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने बताया कि पश्चिमी शुष्क हवा सामान्य से ज्यादा तापमान के प्रति संवेदनशील होते है। इसके नकारात्मक प्रभाव सामान्यतः गेहूं के बाली पर ही देखने को मिलता है। जिसमें गेहूं की बाली छोटा तथा दानें सिकुड़ जाता है और दानों की संख्या तथा वजन दोनों ही प्रभावित हो जाता है। जो अंततः उत्पादकता को घटाने में मुख्य कारक होता है।
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधान तथा गहन अध्ययन से पता चलता है कि किसानों के खेत में ससमय एवं उपयुक्त प्रबंधन की जाए तो टर्मिनल ट्रीट के नकारात्मक प्रभाव को कम करते हुए उत्पादकता को बढ़ाने में कामयाबी हासिल कर सकते है। डाॅ राय ने कहा कि सिंचाई एवं रासायनिक उर्वरक तथा पौधे के नमी को नियंत्रण कर रसायन प्रबंधन का उपयोग कर सकते है। इससे मौसम परिवर्तन एवं जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों को कम करने की संभावनाएं एवं सफलताएं मिल सकती है। दूसरा सिंचाई के उपरांत खाद के उपनिवेश में पोटाश के प्रयोग से फसल को सुरक्षित बचाया जा सकता है। इसके प्रयोग से फसल में गतिशीलता एवं संरक्षण में भी मुख्य भूमिका निभाता है।