
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क पूसा । देश में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली हिंदी सिर्फ भाषा नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी अब दुनिया के बीस से अधिक देशों में पढ़ाई जाती है। ऐसे में विश्व स्तर पर हिंदी के प्रति लोगों की अभिरुचि बढी है। डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के विद्यापति सभागार में आयोजित हिंदी चेतना माह 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार राकेश प्रवीर ने उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषी राज्यों में लोगों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को लेकर जागरूक होना चाहिए।
बताते चलें कि डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के विद्यापति सभागार में हिंदी चेतना माह 2025 का शुभारंभ हुआ। तीस सितंबर तक चलने वाले हिंदी चेतना माह के दौरान विश्वविद्यालय में शिक्षक, वैज्ञानिक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी व छात्र छात्राओं केलिए विविध प्रतियोगितायें आयोजित की जायेंगी, जिसमें हिंदी निबंध प्रतियोगिता, वाद विवाद प्रतियोगिता, आलेख प्रतियोगिता शामिल हैं। इस क्रम में कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जाना हैं। वहीं विश्वविद्यालय में गैर हिंदी भाषी छात्रों एवं पदाधिकारियों के लिए भी विशेष प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित प्रख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार राकेश प्रवीर ने कहा कि इस अवसर पर निदेशक शिक्षा डॉ उमाकांत बेहरा ने कहा कि आश्चर्य होता है जब बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग कहते हैं कि उनकी हिंदी कमजोर है और वे हिंदी नहीं लिख सकते। उन्होंने बताया कि उडिया भाषी होते हुए भी उन्होंने हिंदी में किताब लिखी है।
आधारभूत एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ अमरेश चंद्रा ने कहा कि कुलपति डॉ पीएस पांडेय हिंदी के प्रयोग को लेकर काफी उत्साहित करते हैं और उन्ही के प्रयासों से अब हिंदी चेतना पूरे एक महीने तक मनाया जा रहा है।
मात्स्यिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ पीपी श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी में भी शोध पत्र प्रकाशित किया जाना चाहिए। सामुदायिक महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ उषा सिंह ने कहा बचपन से ही बच्चों को हिंदी भाषी होने पर गर्व का अहसास दिलाना चाहिए।
अभियंत्रण महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ राम सुरेश वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के कार्यों में हिंदी का अब अच्छा प्रयोग हो रहा है लेकिन उसे और बढ़ावा देने की जरूरत है।
राजभाषा अधिकारी डॉ शंकर झा ने राजभाषा विभाग की एक वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी दी और कहा कि हिंदी के प्रयोग को लेकर कई पुरस्कार विश्वविद्यालय को मिले हैं। उन्होंने हिंदी चेतना माह में होने वाले कार्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
मंच संचालन सौरभ द्विवेदी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ ईश प्रकाश ने किया। इस दौरान दौरान डॉ महेश कुमार, डॉ एसके झा, डॉ कुमार राज्यवर्धन सहित वैज्ञानिक, शिक्षक, पदाधिकारी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।