
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
Oini24 डेस्क समस्तीपुर। मई जून की प्रचंड धूप हो, दिसंबर जनवरी की हाड कंपाती ठंढ़, या फिर अनवरत मूसलधार बारिश ही क्यों ने हो समय से कक्षा में पहुंचने वाले प्राध्यापक का नाम है डाॅ प्रभात कुमार। अपने दायित्व के प्रति प्रतिबद्धता पूर्वक समर्पित छात्रों को सहजता व सरलतापूर्वक अनुशासन एवं अध्ययन की लत लगाने वाले व्यक्तित्व का नाम है डाॅ प्रभात कुमार।
समस्तीपुर काॅलेज समस्तीपुर के सभागार में आयोजित विदाई सह सम्मान समारोह के दौरान प्राचार्य डाॅ मीना प्रसाद ने उक्त बातें अपने संबोधन में कही। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रिंसिपल डाॅ मीना प्रसाद ने डाॅ प्रभात के सेवाकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि, डॉ प्रभात अनुशासन और पढाई को लेकर जितने सख्त थे उतने ही भावुक व उदार भी हैं। कई बार गरीब छात्रों केलिए काॅलेज फीस, परीक्षा फीस भी अपने निजी कोष से जमा करते दिख जाते थे। आज इनका छात्र जीवन के हरेक क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं। हमें उनसे इस प्रतिबद्धता समर्पण का सीख लेनी चाहिए।
बताते चलें कि समस्तीपुर काॅलेज समस्तीपुर में लगभग 40 वर्षों तक अंतर-स्नातक से पीजी तक के लाखों विद्यार्थियों के जीवन को संवारने वाले अपने पद, जिम्मेदारी व पेशे के प्रति पूर्णरूपेण समर्पित, पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष, साहित्यकार, कवि-कथाकार डाॅ प्रभात कुमार को समारोहपूर्वक ससम्मान विदाई दी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्रों, कार्यरत शिक्षकों, अतिथि शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, कर्मचारियों, अविभावकों ने उनके कार्यकाल की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
वहीं अपने संबोधन में डॉ० प्रभात कुमार ने कहा कि करीब 40 वर्षों तक समस्तीपुर के इस विख्यात कालेज में सेवा देने का मौका मिला यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं अपनी क्षमतानुसार शत-प्रतिशत अपने दायित्व निर्वहन का प्रयास मात्र किया। मुझे खुशी है कि मेरे पढ़ाये हुए छात्र आज जीवन के हरेक क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं।
अपने सहकर्मियों, उपस्थित लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को दूसरे देशों की तरह सेवानिवृत्त प्रोफेसर से निःशुल्क शिक्षण कार्य लेने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। मेरा दरवाजा जिज्ञासू छात्र-छात्राओं केलिए हमेशा खुला रहेगा, जरूरतमंद छात्र-शिक्षक कभी भी निःसंकोच मेरी सेवा ले सकते हैं।