
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट परीक्षा – 2025 जारी है। परीक्षा का तीसरा दिन यूं तो शान्तिपूर्ण रहा मगर समिति, एवं शिक्षा विभाग द्वारा कदाचारमुक्त, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण परीक्षा – 2025 के संचालन का दावा समस्तीपुर में खोखला साबित हुआ।
जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं शिक्षा भवन कार्यालय में कार्यरत सबसे पुराने कर्मी की स्वेच्छाचारिता का परिणाम है कि दूसरे अनुमंडलों में नियुक्त प्रधानाचार्य / प्रभारी प्रधानाचार्य के कनीय कर्मी को समस्तीपुर अनुमंडल में जिला मुख्यालय स्थित परीक्षा केन्द्र के केंद्राधीक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। इस प्रक्रिया में विभागीय दबंगता का आलम यह है कि जिन विद्यालयों में बाहरी केन्द्राधीक्षक लगाये गये हैं और जिन निजी विद्यालयों में परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं वहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक या व्यवस्थापक की सहमति या अधिग्रहण पत्र नही लिया गया और न इस आशय का उन्हें कुछ दिया गया है।
जानकार सुत्रों की माने तो केन्द्राधीक्षक बनने केलिए कार्यालय में चढावा चढाना अनिवार्य शर्त था। एक उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरीय शिक्षक ने गोपनीयता बरते जाने की शर्त पर कहा कि 5000 देकर केन्द्राधीक्षक बनने से बेहतर है या तो वीक्षक बना रहा जाए या किसी निकटवर्ती विद्यालय में योगदान किया जाय। यही कारण है कि कुछ विद्यालय के प्रधानाचार्य के अतिरिक्त कई कनीय कर्मियों को भी केंद्राधीक्षक बना दिया गया है और वरीय शिक्षक, वीक्षक व अन्य कार्यालयी कार्य करने को बाध्य किया गये हैं।
यही नहीं, कमाल की बात तो यह है कि कायदे कानून को ताक पर रख कर शहर के एकलौते अल्पसंख्यक +2 विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक होने के बावजूद बाहरी केन्द्राधीक्षक नियुक्त कर दिया गया।
इतना ही नहीं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता के पत्रांक -52, दिनांक – 30/01/2025 के मुताबिक “किसी भी परीक्षा केन्द्र पर केंद्राधीक्षक के अनुशंसा एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुमति एवं रेंडमाइजेशन के तहत विक्षण कार्य हेतु निर्गत सूची से अधिक कार्यालय कार्य हेतु शिक्षक / शिक्षकेतर कर्मी नहीं होंगे।” मगर कई परीक्षा केंद्रों पर केंद्राधीक्षक की मनमानी के कारण जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुमति से अधिक कर्मी कार्यालय में काम कर रहे है। कई जगह तो जिस विद्यालय का परीक्षा केन्द्र हैं उसी विद्यालय के कर्मी केन्द्राधीक्षक की सहमति से परीक्षा केन्द्र पर प्रतिनियुक्त रहकर परीक्षार्थियों को अनुचित लाभ पहुंचा रहे है। जो केंद्राधीक्षक की स्वेच्छाचारिता, और दबंगता का प्रमाण है।
यह जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के सबसे पूराने कर्मी की अनुचित लाभ की संस्कृति, और जिला शिक्षा पदाधिकारी की प्रशासनिक अकुशलता या लापरवाही का ज्वलंत उदाहरण है।
उधर शिक्षकों को वाॅश रूम तक से शिक्षक को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग द्वारा अद्यतन स्थिति का मुआयना कराने को मजबूर करने वाले एसीएस फील गुड में हैं कि समस्तीपुर में जम कर स्वच्छ, निष्पक्ष और कदाचारमुक्त परीक्षा हो रहा है।