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अरविन्द कुमार पाठक
ओईनी 24 पूसा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मात्स्यिकी महाविद्यालय, ढोली के प्रांगण में राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस के अवसर पर नीली क्रान्ति के स्तंभों से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुजफ्फरपुर व समस्तीपुर के 20 मत्स्य पालकों ने भाग लिया।
क्रार्यक्रम में उपस्थित मत्स्यकी महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ पीपी श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मत्स्य पालन प्रबंधन व मूल्य संवर्धन से जुड़ी जानकारी देते हुए उन्होंने ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीएस पांडेय मत्स्य पालकों के प्रशिक्षण एवं मछली उत्पादन को बढ़ावा देने केलिए सतत प्रयत्नशील हैं।
डाॅ श्रीवास्तव ने कहा कि मत्स्य पालक नवीनतम तकनीक से मछली पालन कर अपनी आय को बढा सकते हैं। इस दौरान जल कृषि विभाग के प्रधान डॉ. शिवेंद्र कुमार ने मत्स्य पालकों को मत्स्य पालन के विभिन्न आयामों की जानकारी दी, वहीं वैज्ञानिक रौशन कुमार राम ने सजावटी एवं रंगीन मछलियों के पालन एवं प्रजनन के साथ ही एक्वेरियम निर्माण से जुड़ी आवश्यक जानकारियां साझा की।
जबकि डॉ राजीव कुमार ब्रह्मचारी ने मछलियों में लगने वाले रोग एवं उनके उपचार पर विस्तृत चर्चा किया। इसी क्रम में डॉ तनुश्री घोड़ई ने मछलियों से बनने वाले मुल्य वर्धित उत्पाद से होने वाले आय की जानकारी दी।
डॉ. प्रवेश कुमार ने मछलियों के प्रजनन एवं गुणवत्तापूर्ण मछली के जीरा से जुड़े जानकारी दी। वैज्ञानिक अभिलिप्सा विश्वाल ने मोती की खेती से जुड़े विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा किया।
इस दौरान मत्स्य पालकों के बीच मछ्ली का बीचडा प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन राम कुमार ने किया वहीं धन्यवाद ज्ञापन वरीय वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम नाथ झा ने की। इस अवसर पर डॉ राजेश कुमार, सहित कई शिक्षक वैज्ञानिक व प्रशिक्षु उपस्थित थे।