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ओईनी 24 डेस्क/सरायरंजन। संगठन निर्माण की प्रक्रिया में सामुहिक भागीदारी, स्पष्ट वैचारिक समावेश, समानता, अभिव्यक्ति की आजादी के साथ-साथ सम्मान और सहयोग के भावना की आवश्यकता होती है। पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ निर्णय लेने से सामाजिकता और परस्पर अपनापन का बोध होता है।
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के द्वारा अख्तियारपुर कार्यालय सभागार में सामुदायिक संगठन निर्माण और उनका क्षमता विकास के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम दिन शुक्रवार को उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य प्रशिक्षक दूर देहात के सचिव प्रभू नारायण झा ने उक्त बाते कही।
उन्होंन कहा कि मजदूरों की समृद्धि के बिना समृद्ध राष्ट्र की कल्पना की ही नहीं जा सकती। खास कर खेतिहर मजदूरों की, जिन्हें चुनाव के दिनों में सभी नेता अन्नदाता कहते नहीं थकते। उन्होंने कहा कि कृषि हो या औद्योगिक क्षेत्र, या अन्य निर्माण का क्षेत्र हो, मजदूरों पर ही आश्रित हैं। इस प्रकार मजदूर किसी देश के शिल्पी हैं। जब तक देश का शिल्पी भूखा है, असंतुष्ट है तब तक सुखी, सम्पन्न व समृद्ध राष्ट्र की कल्पना व्यर्थ है।
इसके पुर्व दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरुआत समुदाय के साथियों के प्रेरणा गीत से हुआ। मौके पर जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के कार्यकारिणी सदस्य रामप्रित चौरसिया, ललिता कुमारी, कोषाध्यक्ष वीणा कुमारी आदि उपस्थित थे। स्वागत सम्मान, उद्घाटन की औपचारिकता के बाद विषय प्रवेश कराते हुए फैसिलिटेटर राखी कुमारी नें कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सफलता और इन योजनाओं से जुड़ाव के लिए सामुदायिक संगठन को मजबूत बनना आवश्यक है।
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र सरायरंजन प्रखंड के दस गांवों में बीड़ी श्रमिक और असंगठित खेतिहर मजदूरों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच के लिए कार्य कर रही है।
संसाधन सेवी रामप्रित चौरसिया नें कहा कि व्यक्ति के सामुहिक पहल से संगठन बनता है। इसके लिए समान और सटीक विचार का होना जरूरी है। वहीं दिनेश प्रसाद चौरसिया ने कहा कि संगठन अपनें लक्ष्य और मुद्दों के प्रति समर्पण रखे तो आपसी विश्वास कायम रहता है।
इस दौरान बीड़ी श्रमिक मोबीना खातुन और बीना खातुन ने बीड़ी मजदूरों की परेशानी और बीमारी सहित अन्य समस्याओं के बारे में जानकारी दी। खेतिहर मजदूर सुशीला देवी और बेचनी देवी नें सालों भर काम नहीं मिलनें, मनरेगा में भी काम नहीं मिलनें की चर्चा की।
इस दौरान उपस्थित बीड़ी मजदूरों और खेतिहर मजदूरों ने कहा कि जबतक स्थाई और नियमित रूप से रोजगार व वैकल्पिक रोज़गार के अवसर सहित जिस वक्त काम नहीं मिलता है, उस समय के लिए बेरोजगारी भत्ता की व्यवस्था सरकार नहीं करती है, तब तक लोकतंत्र का सपना साकार नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि बिहार के गांवों में भी महाराष्ट्र की भांति मठारी क़ानून को अपनायें जानें की आवश्यकता है। इसके लिए सन्निकट विधानसभा चुनाव के दौरान सभी मजदूर संगठन आवाज बुलंद करेगी।
मौके पर एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम की सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता संगीता कुमारी, रानी कुमारी, पैरवी, नई दिल्ली की समन्वयक वीभा कुमारी तथा जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के स्टेम लैब के शिक्षक रामदयाल साहनी मौजूद थे। धन्यवाद ज्ञापन वीणा कुमारी ने किया।