
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। अगले पांच दिनों में वर्षा की अच्छी संभावना को देखते हुए किसान भाई धान रोपने तैयारी कर लें। इस क्रम में अपने खेतों में मेड़ों को मजबूत बनाने का कार्य करें। धान की बीजस्थली में जो बिचड़े 10 से 15 दिनो के हो गये हो, खर-पतवार निकाल कर तथा प्रति एक हजार वर्ग मीटर बीजस्थली के लिए 5 किलो अमोनियम सल्फेट अथवा 2 किलो यूरिया का उपरिवेशन करें।
इस अवधि में अच्छी बर्षा की संभावना को देखते हुए किसान भाई धान की रोपनी में प्राथमिकता दें। वर्षा जल का उपयोग कर रोपनी के कार्य में प्राथमिकता दें। रोपाई पूर्व खेतों की तैयारी के समय कदवा के दौरान मध्यम एवं लम्बी अवधि की किस्मों के लिए 30 किलोग्राम नेत्रजन, 60 किलोग्राम स्फुर एवं 30 किलोग्राम पोटाश तथा अगात किस्मों के लिए 25 किलोग्राम नेत्रजन, 40 किलोग्राम स्फुर एवं 30 किलोग्राम पोटाश के साथ 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट या 15 किलोगा्रम प्रति हेक्टर चिलेटेड जिंक का व्यवहार करें।
धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 2-3 दिन बाद तथा एक सप्ताह के अन्दर ब्यूटाक्लोर (3 लीटर दवा प्रति हेक्टेयर) या प्रीटलाक्लोर (1.5 लीटर दवा प्रति हेक्टर) या पेन्डीमिथेलीन (3 लीटर दवा प्रति हेक्टर) का 500-600 लीटर पानी मे घोल बनाकर एक हेक्टर क्षेत्र में छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करें।
खरीफ प्याज की नर्सरी (बीजस्थली) गिरावें। एन0-53, एग्रीफाउण्ड र्डाक रेड, अर्का कल्याण, भीमा सुपर खरीफ प्याज के लिए अनुशंसित किस्में है। बीज गिराने के पूर्व बीज को केप्टन या थीरम/2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर बीजोपचार कर लें। बीज की दर 8-10 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर रखें। पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए 40 प्रतिशत छायादार नेट से 6-7 फीट की ऊचाई पर ढ़क सकते है। प्याज के स्वस्थ पौध के लिए पौधषाला से नियमित रूप से खरपतवार को निकालते रहें।
मिर्च का बीज उथली क्यारियों मे गिराये। इसके लिए उन्नत प्रभेद पंत मिर्च-3, कृष्णा, अर्का लोहित, पूसा ज्वाला, पूसा सदाबहार, पंजाब लाल, काषी अनमोल तथा संकर किस्में अग्नि रेखा, कल्याणपुर चमन, कल्याणपुर चमत्कार, बी0एस0एस0-267 अनुशंसित है। उन्नत किस्मों के लिए बीज दर 1 से 1.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा 200 से 300 ग्राम संकर किस्मों के लिए रखें। क्यारियों की चैड़ाई एक मीटर तथा लम्बाई सुविधानुसार 3-4 मीटर रखें। बीज को गिराने से पूर्व थायरम 75 प्रतिषत दवा से बीजोपचार करें।
जिन आम लीची के पेड़ो की उम्र 10 वर्ष से अधिक हो, उनकी आयु के अनुसार फलन समाप्त होने के बाद अनुशंसित उर्वरको जैसे 15-20 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद, 1.25 किलोग्राम नेत्रजन, 300-400 ग्राम फाॅसफोरस,1.0 किलोग्राम पोटाश, 50 ग्राम बोरेक्स तथा 15-20 ग्राम थाइमेट प्रति पेड़ प्रति वर्ष के अनुसार उपयोग करें। जिससे अगले वर्ष पेड़ फलन में आ सकें तथा उनका स्वास्थ्य अच्छा बना रहें।