
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
पूसा । विकसित कृषि संकल्प अभियान के 14वें दिन बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली की दो टीमों ने 6 पंचायतों का भ्रमण किया। जिसमें इंजीनियर विनीता कश्यप के नेतृत्व वाली टीम वन ने कल्याणपुर के खरसंद पूर्वी, सिमरिया भिंडी एवं पुरुषोत्तमपुर पंचायत में किसानों संग संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र से सुमित कुमार सिंह डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से डॉक्टर महेश कुमार डॉक्टर अब्बास अहमद एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूसा क्षेत्र से डॉक्टर सतीश नायक मौजूद रहे।
डाॅ धीरू कुमार तिवारी के नेतृत्व वाली टीम टू ने पटोरी के जोरपुरा, दरबार एवं बहादुरपुर पटोरी पंचायत में कार्यक्रम किया। इस टीम में भारतीय उपाध्याय कृषि विज्ञान केंद्र तथा डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय पूसा से इंजीनियर दिनेश रजक तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा से डॉक्टर तमोगना मौजूद थे।
इस दौरान सर्वप्रथम वैज्ञानिकों ने कृषि से जुडी नई-नई तकनीकों के बारे में किसानो को बताया। इसके बाद फीडबैक कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों से कृषि में होने वाले विभिन्न समस्याओं की जानकारी ली। इस दौरान किसानों ने मुख्य रूप से बैगन की फसल में फल और तना छेदक तथा परवल में नीमाटोड की समस्या तथा फ्रूट फ्लाई कीट की समस्या का जिक्र किया।
इसके समाधान के लिए बैगन में फिरेमोन ट्रैप को एक एकड़ के खेत में लगभग 12 से 14 की संख्या में लगाने का सुझाव दिया गया तथा अधिक समस्या देखने पर उसमें लेमडासाइहैलोथिनएक एमएल प्रति 3 लीटर पानी के हिसाब से मिला कर स्प्रे करने का सुझाव दिया। परवल में निमेटोड की समस्या से बचाव के लिए गर्मी में गहरी जुताई के साथ उसे खेत में फसल चक्र अपनाने का सुझाव दिया गया तथा फल मक्खी के समाधान के लिए फ्रूट फ्लाई ट्रैप को परवल में लगाने का सुझाव दिया गया।
इसके साथ ही साथ किसानों ने विभिन्न फसलों में विभिन्न प्रकार के खरपतवार की समस्या की जानकारी वैज्ञानिकों को उपलब्ध कराई। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने पूसा विश्वविद्यालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थाओं द्वारा विकसित धान, मक्का आदि मोटे अनाज एवं अन्य फसलों के विभिन्न प्रजाति/प्रभेदों की जानकारी भी दी। साथ ही खेती में खेत के समतलीकरण की महत्ता, एवं फलदार पौधों में फलों की तुड़ाई के बाद उसके प्रबंधन की भी जानकारी उपलब्ध कराई गई।