
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर । कोई भी बाल विवाह किसी पंडित, मौलवी या पादरी या फिर गुरू के बिना संपन्न नहीं हो सकता। यह देखते हुए हमनें उन्हें बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ने का फैसला किया। इसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए हम उम्मीद कर सकते हैं इस अक्षय तृतीया पर जिले में एक भी बाल विवाह नहीं होने पाएगा।
जिला में बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए कार्यरत संगठन जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव सुरेन्द्र कुमार नें अगामी 30 अप्रैल को बाल विवाह मुक्त भारत निर्माण को लेकर आयोजित संकल्प सभा के बारे में संवाददाताओं जानकारी देते हुए उक्त बातें कही।
उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं से मिला अप्रत्याशित सहयोग व समर्थन अभिभूत करने वाला है। बताते चलें कि बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश में नागरिक समाजिक संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) की सहयोगी संगठन जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र की ओर से अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम को देखते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए विभिन्न धर्मों के विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहितों व धर्म गुरूओं के बीच चलाए गये जागरूकता अभियान को व्यापक सफलता मिली है और सभी धर्मगुरुओं नें इसकी सराहना करते हुए समर्थन व सहयोग का हाथ बढ़ाया है।
श्री सुरेन्द्र ने कहा कि आज जिले में तमाम मंदिरों-मस्जिदों के आगे ऐसे बोर्ड लगे हुए जिन पर स्पष्ट लिखा है कि यहां बाल विवाह की अनुमति नहीं है। गौरतलब है कि जेआरसी 2030 तक देश से बाल विवाह खत्म करने के मकसद से चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया कैम्पेन चला रहा है।
जेआरसी, कानूनी हस्तक्षेपों के जरिए बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के 416 जिलों में जमीन पर काम कर 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों का नेटवर्क है जिसने पिछले वर्षों में दो लाख से ज्यादा बाल विवाह रुकवाए हैं और पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। इसके सहयोगी संगठन जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र नें स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग व समन्वय से कानूनी हस्तक्षेपों और परिवारों एवं समुदायों को समझा-बुझा कर अकेले 2023-24 में ही जिले में 6000 बाल विवाह रुकवाए हैं।
यह संगठन 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जेआरसी के संस्थापक भुवन ऋभु की किताब ‘व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन: टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज’ में सुझाई गई समग्र रणनीति पर अमल कर रहा है। जवाहर ज्योति बाल विकास के सचिव सुरेन्द्र कुमार नें कहा कि अभी भी देश में बाल विवाह के खिलाफ जरूरी जागरूकता की कमी है। ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं है कि यह बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है।
इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है।
मौके पर महिला हेल्प लाईन के जिला परियोजना प्रबंधक जितेन्द्र कुमार साहू, केन्द्र प्रशासक ज्योति अर्चना, जेजेबीवीके की समन्वयक दिप्ती कुमारी, स्मृति कुमारी, विभा कुमारी, दिनेश प्रसाद चैरसिया, माजदा खातून, राखी कुमारी, सूरज कुमार, रोमा गुप्ता, दीप शिखा कुमारी, ब्यूटी कुमारी, अनिकेत कुमार, सहित कई लोग मौजूद थे।